HIT AND HOT NEWS

🇪🇺🤝🇯🇴 यूरोपीय संघ और जॉर्डन की नई रणनीतिक साझेदारी: मध्य पूर्व में शांति और विकास की नई दिशा


मध्य पूर्व में स्थिरता और सहयोग की ओर एक उल्लेखनीय कदम उठाते हुए यूरोपीय संघ (EU) ने जॉर्डन के साथ एक विस्तृत रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को “हमारे साझा भूमध्यसागरीय क्षेत्र में शांति और समृद्धि की मजबूत नींव” करार दिया।


🔹 साझेदारी का ढांचा और मुख्य उद्देश्य

इस नई साझेदारी के अंतर्गत यूरोपीय संघ ने जॉर्डन को €3 अरब (लगभग ₹27,000 करोड़) की आर्थिक और निवेश सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। यह सहायता जॉर्डन के विकास और सामाजिक उत्थान को ध्यान में रखते हुए चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है:

  1. आर्थिक वृद्धि और निवेश प्रोत्साहन
  2. शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे का सुदृढ़ीकरण
  3. ऊर्जा एवं जल प्रबंधन में नवाचार और स्थायित्व
  4. राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय शांति को प्रोत्साहन

यह साझेदारी केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक सहयोगी ढांचा है जो दोनों पक्षों के लिए समान रूप से लाभकारी साबित हो सकता है।


🔹 जॉर्डन: मध्य पूर्व में संतुलन और स्थिरता का प्रतीक

राजा अब्दुल्ला द्वितीय के नेतृत्व में जॉर्डन ने हमेशा से क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की भूमिका निभाई है।

इन सभी प्रयासों ने जॉर्डन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “स्थिरता का स्तंभ” बना दिया है। यूरोपीय संघ ने इसी विश्वसनीयता के आधार पर यह साझेदारी और अधिक सुदृढ़ की है।


🔹 आगामी EU-जॉर्डन शिखर सम्मेलन: एक नया कूटनीतिक अध्याय

वर्ष 2026 में होने वाला पहला EU-जॉर्डन शिखर सम्मेलन इस सहयोग को औपचारिक रूप से नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। इस सम्मेलन में केवल आर्थिक या राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी, बल्कि

यह आयोजन यूरोप और मध्य पूर्व के बीच संवाद, विश्वास और साझेदारी को एक नई गति देगा।


🔹 भारत के दृष्टिकोण से संभावनाएँ

भारत, जो यूरोपीय संघ और जॉर्डन दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है, इस साझेदारी से कई अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त कर सकता है:


✍️ निष्कर्ष

यूरोपीय संघ और जॉर्डन के बीच यह नई रणनीतिक साझेदारी केवल एक आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण है—जो मध्य पूर्व में स्थिरता, विकास और शांति की दिशा में निर्णायक कदम सिद्ध हो सकता है।
आगामी EU-जॉर्डन शिखर सम्मेलन इस साझेदारी को औपचारिक रूप से नई ऊँचाइयाँ देगा और वैश्विक कूटनीति में एक नया अध्याय जोड़ेगा।


Exit mobile version