
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्षों और अस्थिर राजनीतिक समीकरणों के बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर अपनी दृढ़ सुरक्षा नीति और राष्ट्रीय एकता पर जोर देते हुए देश को स्पष्ट संदेश दिया है। यह बयान केवल एक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि इस्राइल की सामूहिक चेतना और उसकी आत्मरक्षा की भावना का प्रतीक भी है।
🔥 क्षेत्रीय अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियाँ
नेतन्याहू ने अपने हालिया संबोधन में स्पष्ट कहा कि हिज़बुल्लाह और ईरान जैसे संगठन व देश इस्राइल की सीमाओं के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। उन्होंने हिज़बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह को सख्त चेतावनी दी कि यदि इस्राइल पर कोई हमला होता है, तो उसका जवाब “ऐसा होगा जिसे वह सोच भी नहीं सकता।”
ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा को नेतन्याहू ने इस्राइल के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक जोखिम बताया, जो न केवल अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि आतंकवादी संगठनों को सक्रिय समर्थन भी दे रहा है।
मुख्य खतरे इस प्रकार हैं:
- हिज़बुल्लाह की मिसाइल और ड्रोन क्षमता
- ईरान का परमाणु एवं क्षेत्रीय प्रभाव विस्तार
- गाज़ा, सीरिया और लेबनान से बहु-दिशात्मक हमलों की संभावना
🛡️ इस्राइल की सुरक्षा नीति: शक्ति, तैयारी और संकल्प
नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा कि इस्राइल किसी भी प्रकार की धमकी को हल्के में नहीं लेगा। उन्होंने बताया कि देश की रक्षा सेनाएँ (IDF) और खुफिया एजेंसियाँ हर स्तर पर सजग और सक्रिय हैं। यदि इस्राइल पर हमला हुआ, तो वह अपने विरोधियों को “इतिहास का सबसे कड़ा सबक” सिखाने में पीछे नहीं हटेगा।
उनके अनुसार,
“हमारी सुरक्षा नीति दो सिद्धांतों पर आधारित है — पहले, आक्रमण से पहले तैयारी; और दूसरे, किसी भी हमले का जवाब निर्णायक ताकत से देना।”
🤝 सामाजिक एकता: विविधता में शक्ति
नेतन्याहू ने अपने वक्तव्य में इस्राइली समाज की बहुलता को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि यहूदी और अरब नागरिकों के बीच सहयोग, धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष वर्गों का संतुलन, और संकट के समय आपसी एकजुटता — यही इस्राइल की असली रक्षा ढाल है।
मुख्य बिंदु:
- यहूदी और अरब समुदायों के बीच बढ़ता सामंजस्य
- धर्मनिरपेक्ष और धार्मिक समूहों का सहयोग
- राष्ट्रीय संकट में सामाजिक समरसता की भूमिका
🌍 वैश्विक परिप्रेक्ष्य: इस्राइल का बढ़ता प्रभाव
इस्राइल आज न केवल एक क्षेत्रीय शक्ति है, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी, संयुक्त राष्ट्र में सक्रिय कूटनीति, तथा साइबर और रक्षा प्रौद्योगिकी में अग्रणी भूमिका — यह सब दर्शाते हैं कि इस्राइल अब केवल आत्मरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा ढांचे का भी एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है।
🕊️ निष्कर्ष
बेंजामिन नेतन्याहू का हालिया बयान केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आह्वान है — एक ऐसा संदेश जो बताता है कि इस्राइल अपनी सीमाओं, नागरिकों और मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
यह देश भले ही संघर्षों से घिरा हो, लेकिन उसकी असली पहचान उसकी एकता, दृढ़ता और अस्तित्व के संकल्प में निहित है।
इस्राइल की कहानी दरअसल यह सिखाती है कि जब कोई राष्ट्र अपनी सुरक्षा और समाज – दोनों को समान प्राथमिकता देता है, तब वह न केवल अस्तित्व बनाए रखता है, बल्कि इतिहास में अपनी पहचान भी अमर कर देता है।