
हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तीखा और विवादास्पद बयान दिया — “अमेरिका ने ही चीन की सैन्य शक्ति को खड़ा किया।”
यह टिप्पणी न केवल वॉशिंगटन की पुरानी नीतियों पर सवाल उठाती है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन और सामरिक रणनीति पर भी गहरा प्रभाव डालती है।
आइए जानते हैं, ट्रंप के इस बयान के पीछे का तर्क और इसके अंतरराष्ट्रीय मायने क्या हैं।
🧭 ट्रंप के बयान का संदर्भ
ट्रंप ने यह बयान अपने एक हालिया भाषण में दिया, जहां उन्होंने अमेरिका की पूर्ववर्ती सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने चीन के साथ ऐसे आर्थिक और तकनीकी संबंध बनाए, जिन्होंने बीजिंग को वैश्विक शक्ति बनने का मौका दिया।
उनका कहना था कि अमेरिका ने दशकों तक चीन को “बाजार, पूंजी और तकनीक” दी — और अब वही चीन सैन्य रूप से अमेरिका को चुनौती देने की स्थिति में है।
🏗️ कैसे अमेरिका ने अनजाने में चीन को सशक्त किया
1. आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते
1980 के दशक से अमेरिका ने चीन को विश्व व्यापार प्रणाली में शामिल करने में मदद की।
चीन को “सबसे अनुकूल राष्ट्र” का दर्जा मिला, जिससे विदेशी निवेश और निर्यात में तेज़ी आई। यही पूंजी चीन की औद्योगिक और तकनीकी नींव बनी।
2. टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और कॉरपोरेट साझेदारी
अमेरिकी कंपनियों ने उत्पादन लागत घटाने के लिए अपने कारखाने चीन में लगाए।
इससे न केवल उत्पादन कौशल बढ़ा, बल्कि चीन को उन्नत तकनीकी संरचना, डेटा और औद्योगिक प्रबंधन का अनुभव भी मिला — जो बाद में उसके रक्षा उद्योग में उपयोग हुआ।
3. शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग
हज़ारों चीनी छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों में इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और रक्षा तकनीक से जुड़ी शिक्षा लेने गए।
इनमें से कई छात्र और वैज्ञानिक बाद में चीन के रक्षा अनुसंधान संस्थानों और अंतरिक्ष कार्यक्रमों का हिस्सा बने।
🛡️ चीन की मौजूदा सैन्य शक्ति: एक नयी चुनौती
- AI और साइबर युद्ध क्षमता – चीन अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा में अग्रणी देशों में गिना जाता है।
- हाइपरसोनिक मिसाइलें और नौसेना आधुनिकीकरण – हाल के वर्षों में चीन ने अपने नौसैनिक बेड़े और मिसाइल प्रणालियों को आधुनिकतम तकनीकों से सुसज्जित किया है।
- अंतरिक्ष रक्षा कार्यक्रम – बीजिंग अब अंतरिक्ष को भी अपनी रणनीतिक सुरक्षा का हिस्सा मानता है, जहां उपग्रह नियंत्रण और अंतरिक्ष हथियार विकास पर काम जारी है।
🔍 राजनीतिक और कूटनीतिक निहितार्थ
- अमेरिकी विदेश नीति पर पुनर्विचार
ट्रंप का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि अमेरिका को अपनी पुरानी आर्थिक नीतियों की समीक्षा करनी होगी — खासकर उन नीतियों की, जिन्होंने चीन को तकनीकी और औद्योगिक रूप से सक्षम बनाया। - चीन-अमेरिका संबंधों में नई खटास
पहले से ही तनावपूर्ण व्यापारिक और रणनीतिक संबंध इस तरह के बयानों से और अधिक जटिल हो सकते हैं। - वैश्विक शक्ति संतुलन पर असर
यदि यह मान लिया जाए कि अमेरिका ने अनजाने में चीन की शक्ति को बढ़ावा दिया, तो यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शक्ति समीकरण को अस्थिर कर सकता है।
🧠 निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी भी है।
यह अमेरिका की उस नीति की आलोचना है, जिसने सहयोग और व्यापार के नाम पर अपने ही प्रतिद्वंद्वी को ताकतवर बना दिया।
आज चीन जिस सैन्य ऊंचाई पर है, वह केवल उसकी नीतियों का परिणाम नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग — विशेष रूप से अमेरिकी पूंजी और तकनीकी सहायता — का भी नतीजा है।
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