
संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा हाल ही में जारी “ग्लोबल फॉरेस्ट रिसोर्सेस असेसमेंट 2025” रिपोर्ट में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। रिपोर्ट बताती है कि भारत अब विश्व के उन शीर्ष दस देशों में शामिल हो गया है जिनके पास सबसे अधिक वन क्षेत्र है — और वर्तमान में भारत 9वें स्थान पर स्थित है। यही नहीं, वार्षिक वन वृद्धि दर के मामले में भारत लगातार तीसरे स्थान पर बना हुआ है, जो पर्यावरणीय प्रबंधन और सतत विकास के प्रति देश की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
🌱 हरियाली की दिशा में सुनियोजित प्रयास
भारत ने पिछले दशक में अपनी वन नीति को अधिक समावेशी और तकनीक-आधारित बनाया है। इसके परिणामस्वरूप देशभर में वनों के विस्तार और पुनर्जीवन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इस सफलता के पीछे कई ठोस कदम हैं:
- राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम (NAP) के अंतर्गत बड़े पैमाने पर पौधारोपण और हरित पट्टियों का निर्माण।
- CAMPA फंड के पारदर्शी उपयोग से राज्यों को पुनर्वनीकरण के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता मिली।
- जनजातीय और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी, जिससे संरक्षण केवल सरकारी नहीं बल्कि सामाजिक आंदोलन बन गया।
- सैटेलाइट आधारित निगरानी प्रणाली और GIS तकनीक के माध्यम से वनों की वास्तविक समय पर निगरानी ने पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई।
🌏 वैश्विक जलवायु मिशन में भारत की सशक्त उपस्थिति
FAO की रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि भारत न केवल अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों को गंभीरता से ले रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर जलवायु नेतृत्व की भूमिका भी निभा रहा है।
भारत ने COP जलवायु सम्मेलनों में स्पष्ट रूप से यह वादा किया है कि वह 2030 तक 2.5 से 3 बिलियन टन अतिरिक्त कार्बन अवशोषण का लक्ष्य पूरा करेगा — जो उसके वन क्षेत्र के विस्तार से ही संभव होगा। इस प्रकार, भारत के वन अब केवल जैविक संपदा नहीं, बल्कि कार्बन संतुलन के प्रमुख स्तंभ बन गए हैं।
🐅 जैव विविधता का मजबूत किला
भारत के वनों में जीवन का असीम संसार बसता है — यह पृथ्वी के सबसे विविध पारिस्थितिक तंत्रों में से एक है।
यहाँ:
- 500 से अधिक स्तनधारी प्रजातियाँ,
- 1300 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ,
- और हजारों दुर्लभ वनस्पतियाँ और औषधीय पौधे पाए जाते हैं।
वनों की निरंतर वृद्धि से इन प्रजातियों को सुरक्षित आवास मिला है और जैव विविधता संरक्षण को नई गति मिली है।
⚠️ चुनौतियाँ अब भी मौजूद
फिर भी, इस हरित प्रगति की राह में कुछ गंभीर चुनौतियाँ भी हैं —
- अनियंत्रित शहरीकरण और औद्योगीकरण से वन भूमि पर दबाव बढ़ा है।
- अवैध कटाई, वन्यजीव तस्करी और भूमि उपयोग में बदलाव जैसे खतरे अब भी बने हुए हैं।
- जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान और वर्षा पैटर्न में अस्थिरता वनों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक है कि सरकार स्थानीय स्तर पर समुदायों की भागीदारी, वैज्ञानिक प्रबंधन, और नीतिगत पारदर्शिता को और सशक्त बनाए।
🌟 निष्कर्ष
भारत का FAO रिपोर्ट में 9वें स्थान पर पहुँचना केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि एक संदेश है — कि जब नीति, जनसहभागिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण एक साथ काम करते हैं, तो पर्यावरणीय विकास और आर्थिक प्रगति साथ-साथ संभव है।
यह उपलब्धि भारत के लिए गर्व का विषय है और यह साबित करती है कि वैश्विक पर्यावरणीय नेतृत्व में भारत अब केवल सहभागी नहीं, बल्कि एक प्रेरक शक्ति (Driving Force) बन चुका है।