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🌍 यूरोपीय परिषद की बैठक में प्रवासन नीति पर नई दिशा: मेलोनी, फ्रेडरिकसन और स्कोफ की संयुक्त पहल


ब्रसेल्स में हाल ही में संपन्न हुई यूरोपीय परिषद की बैठक का केंद्रबिंदु रहा — प्रवासन (Migration) नीति में सुधार और साझा यूरोपीय दृष्टिकोण का निर्माण। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन, और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री डिक स्कोफ ने इस मुद्दे पर एक अनौपचारिक लेकिन प्रभावशाली चर्चा सत्र का नेतृत्व किया।

🔹 बैठक का उद्देश्य और सहभागी देश

इस संवाद का मुख्य लक्ष्य था — यूरोप में बढ़ते प्रवासी दबाव से निपटने के लिए व्यावहारिक, मानवीय और समन्वित रणनीति तैयार करना।
बैठक में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन सहित कई सदस्य देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें ऑस्ट्रिया, जर्मनी, बेल्जियम, बुल्गारिया, ग्रीस, साइप्रस, पोलैंड, स्वीडन, माल्टा, लातविया और अन्य शामिल थे।

🔹 प्रमुख चर्चाएं और नीति प्रस्ताव

बैठक में वॉन डेर लेयेन ने दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर बल दिया:

  1. वापसी विनियमन (Return Regulation) का त्वरित क्रियान्वयन, जिससे अवैध प्रवासियों को उनके मूल देशों में शीघ्रता से वापस भेजा जा सके।
  2. सुरक्षित मूल देशों की एकीकृत यूरोपीय सूची को शीघ्र अंतिम रूप देना, ताकि शरण आवेदन की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और न्यायसंगत हो सके।

इसी क्रम में जॉर्जिया मेलोनी ने इटली की ओर से कई ठोस कदम प्रस्तावित किए —

🔹 यूरोपीय सहयोग की नई रूपरेखा

बैठक से स्पष्ट संदेश गया कि यूरोपीय संघ अब प्रवासन को किसी एक देश की चुनौती नहीं, बल्कि एक सामूहिक यूरोपीय दायित्व के रूप में देख रहा है।
संघ के भीतर सूचना साझाकरण, सीमा प्रबंधन में तकनीकी समाधान, और अफ्रीकी साझेदार देशों के साथ गहन संवाद को नई प्राथमिकता दी जा रही है।

🔹 निष्कर्ष: नीति से व्यवहार की ओर

यह बैठक यूरोप की प्रवासन नीति को एक निर्णायक मोड़ पर ले आई है। मेलोनी, फ्रेडरिकसन और स्कोफ जैसे नेताओं की सक्रिय भूमिका यह दर्शाती है कि यूरोप अब प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रहा है।
यदि प्रस्तावित योजनाएं लागू होती हैं, तो यह न केवल यूरोपीय सीमाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी, बल्कि यूरोप-अफ्रीका संबंधों को भी विकास और साझेदारी के नए युग में प्रवेश कराएगी।


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