
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2025 — हर वर्ष 26 अक्टूबर को दुनिया भर में इंटरसेक्स अवेयरनेस डे (Intersex Awareness Day) मनाया जाता है। यह दिन उन लोगों के अधिकारों और अस्तित्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रतीक है जो इंटरसेक्स (Intersex) होते हैं — यानी जिनका जन्म ऐसे शारीरिक या जैविक गुणों के साथ होता है जो सामान्यतः पुरुष या महिला के पारंपरिक वर्गीकरण में पूरी तरह फिट नहीं बैठते।
🔹 इंटरसेक्स क्या है?
“इंटरसेक्स” शब्द का अर्थ उन व्यक्तियों से है जिनके जननांग, गुणसूत्र या हार्मोनल पैटर्न पारंपरिक “पुरुष” या “महिला” श्रेणियों से अलग होते हैं। यह एक प्राकृतिक जैविक विविधता है, न कि कोई रोग या विकार।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया की आबादी का लगभग 1.7 प्रतिशत हिस्सा इंटरसेक्स के रूप में जन्म लेता है — यानी यह संख्या लाल बालों वाले लोगों से भी अधिक है।
🔹 इस दिवस का इतिहास
26 अक्टूबर 1996 को अमेरिका के बोस्टन शहर में इंटरसेक्स समुदाय ने पहली बार एकजुट होकर मेडिकल संस्थाओं के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था।
उस दिन उन्होंने समाज और चिकित्सा संस्थानों से यह मांग की थी कि इंटरसेक्स बच्चों पर बिना अनुमति सर्जरी या हार्मोनल उपचार बंद किए जाएं, और उनके मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए।
इसी ऐतिहासिक दिन की याद में हर साल 26 अक्टूबर को “इंटरसेक्स अवेयरनेस डे” के रूप में मनाया जाता है।
🔹 उद्देश्य और महत्व
इस दिवस का मुख्य उद्देश्य समाज में स्वीकृति, जागरूकता और समान अधिकारों को बढ़ावा देना है।
यह दिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि –
क्या हम अपने समाज में लैंगिक विविधता (Gender Diversity) को पर्याप्त सम्मान दे रहे हैं?
क्या स्कूल, अस्पताल और परिवार इंटरसेक्स बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार कर रहे हैं?
और क्या कानून उन्हें समान अवसर और सुरक्षा दे रहा है?
इंटरसेक्स अवेयरनेस डे का उद्देश्य है कि लोग “लिंग की पहचान से पहले इंसान की पहचान” को समझें।
🔹 भारत में इंटरसेक्स अधिकारों की स्थिति
भारत में इंटरसेक्स समुदाय की स्थिति धीरे-धीरे चर्चा में आ रही है।
2014 में सुप्रीम कोर्ट ने “नालसा बनाम भारत सरकार” (NALSA vs Union of India) के फैसले में तीसरे लिंग को कानूनी मान्यता दी।
2021 में मद्रास हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश देते हुए कहा कि इंटरसेक्स बच्चों पर जन्म के समय कोई अनावश्यक सर्जरी नहीं की जानी चाहिए।
कई राज्य सरकारें अब इंटरसेक्स और ट्रांसजेंडर समुदायों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार योजनाएँ शुरू कर रही हैं।
हालांकि अभी भी सामाजिक स्वीकृति, स्वास्थ्य सुविधाओं और पारिवारिक समर्थन के स्तर पर सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।
🔹 दुनिया में जागरूकता की दिशा में प्रयास
अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और नेपाल जैसे देशों ने इंटरसेक्स व्यक्तियों के अधिकारों के लिए विशेष कानून और नीतियाँ लागू की हैं।
कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे संयुक्त राष्ट्र (UN), एमनेस्टी इंटरनेशनल, और ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी इंटरसेक्स समुदाय के लिए “No Surgery Without Consent” अभियान चलाया है।
🔹 समाज की भूमिका
इंटरसेक्स समुदाय को स्वीकारना सिर्फ कानून या नीति की बात नहीं है — यह समाज की सोच बदलने का विषय है।
स्कूलों में लिंग शिक्षा (Gender Education), मीडिया में सकारात्मक प्रस्तुति और परिवारों में जागरूकता से इस समुदाय के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
🔹 निष्कर्ष
इंटरसेक्स अवेयरनेस डे हमें यह याद दिलाता है कि विविधता ही मानवता की असली खूबसूरती है।
समाज का कर्तव्य है कि वह हर व्यक्ति को — चाहे उसका शरीर, लिंग या पहचान कुछ भी हो — सम्मान, समानता और स्वतंत्रता का अधिकार दे।
वास्तविक प्रगति वही है जहाँ हर इंसान खुद को बिना डर और भेदभाव के “स्वीकार किया गया” महसूस करे।
📅 तारीख: 26 अक्टूबर 2025
🌍 अवसर: इंटरसेक्स अवेयरनेस डे
🎯 उद्देश्य: इंटरसेक्स व्यक्तियों के अधिकारों, सम्मान और पहचान के प्रति जागरूकता फैलाना
🇮🇳 भारत में स्थिति: कानूनी मान्यता के बाद धीरे-धीरे बढ़ती स्वीकृति, लेकिन सामाजिक सुधार की आवश्यकता