
भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा साझा किए गए नवीनतम #Weeknama में 26 अक्टूबर 2025 का दिन राष्ट्र निर्माण की दिशा में तीन प्रमुख पहलों का साक्षी बना। यह दिन देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक परिदृश्य में सक्रिय सहभागिता का प्रतीक रहा। आइए, इस सप्ताह की इन तीन उल्लेखनीय घटनाओं पर दृष्टि डालते हैं।
🛕 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सबरीमाला मंदिर दर्शन: आध्यात्मिक समरसता का प्रतीक
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश को एकता और श्रद्धा का संदेश दिया। यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के समावेशी स्वरूप का द्योतक रही। दक्षिण भारत की परंपराओं से जुड़ते हुए राष्ट्रपति ने यह भी दर्शाया कि आध्यात्मिकता और सामाजिक समानता भारतीय पहचान के अभिन्न अंग हैं। यह पहल महिलाओं की भागीदारी और धार्मिक सह-अस्तित्व की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश देती है।
👨💼 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 51,000 नियुक्ति पत्रों का वितरण: युवाओं के भविष्य में नई ऊर्जा
रोजगार मेला के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के युवाओं को 51,000 से अधिक नियुक्ति पत्र सौंपे। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। इस आयोजन ने न केवल सरकारी रोजगार अवसरों को रेखांकित किया, बल्कि युवाओं में विश्वास और उत्साह का संचार भी किया। यह कार्यक्रम इस तथ्य को दोहराता है कि भारत का विकास तब ही संभव है जब युवा वर्ग आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हो।
🚉 छठ पूजा से पहले रेलवे व्यवस्थाओं की समीक्षा: त्योहारों में सुविधा का वचन
केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का निरीक्षण कर आगामी छठ पर्व के मद्देनज़र तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और यात्री सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं का आकलन किया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। यह पहल त्योहारों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और सहज यात्रा अनुभव को सुनिश्चित करने की दिशा में एक सक्रिय प्रशासनिक कदम मानी जा रही है।
🔍 निष्कर्ष: एक सप्ताह, तीन दृष्टिकोण—राष्ट्र निर्माण की निरंतर यात्रा
26 अक्टूबर 2025 का यह सप्ताहनामा भारत की प्रगतिशील सोच, प्रशासनिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण है। राष्ट्रपति का आध्यात्मिक संवाद, प्रधानमंत्री की रोजगार दृष्टि और रेल मंत्री की सार्वजनिक सेवा समीक्षा—तीनों मिलकर इस तथ्य को पुष्ट करते हैं कि भारत सरकार का दृष्टिकोण केवल नीतियों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक पहुँचने वाला है।