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🌅 छठ महापर्व: संस्कृति, पर्यावरण और समाज का अद्भुत संगम


भारत की समृद्ध परंपराओं में छठ महापर्व वह पर्व है जो श्रद्धा, अनुशासन और प्रकृति के प्रति आदर का प्रतीक है। यह त्योहार न केवल सूर्य देव और छठी मइया की उपासना से जुड़ा है, बल्कि यह मानव और प्रकृति के सामंजस्य की भारतीय भावना को भी उजागर करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 127वें संस्करण में इसी भाव को रेखांकित करते हुए कहा कि छठ पर्व भारत की संस्कृति, समाज और पर्यावरण के बीच गहरे संबंधों का प्रतीक है।


☀️ छठ पर्व की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि

छठ पूजा मुख्यतः बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़े उल्लास से मनाई जाती है। यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और चार दिनों तक चलने वाली यह साधना शुद्धता, संयम और भक्ति से परिपूर्ण होती है।

  1. नहाय-खाय: प्रथम दिन व्रती स्नान कर शुद्ध भोजन करते हैं, जिससे शरीर और मन की पवित्रता बनी रहे।
  2. खरना: दूसरे दिन गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर उपवास की शुरुआत होती है।
  3. संध्या अर्घ्य: तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है — यह कृतज्ञता और आभार का प्रतीक है।
  4. उषा अर्घ्य: अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन होता है।

🌿 प्रकृति से तादात्म्य और पर्यावरण चेतना

छठ पर्व का हर चरण प्रकृति के प्रति सम्मान का भाव लिए होता है। यह पूजा प्रायः नदियों, तालाबों या जलाशयों के किनारे की जाती है — जिससे जल स्रोतों की पवित्रता, संरक्षण और स्वच्छता का संदेश समाज तक पहुंचता है। व्रती लोग सात्विक भोजन और प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करते हैं, जिससे सतत जीवनशैली और पर्यावरणीय संतुलन की भावना को बल मिलता है।


🧑‍🤝‍🧑 सामाजिक एकता और लोक संस्कृति का उत्सव

छठ महापर्व समाज में समानता और एकता का जश्न मनाता है। इस दिन जाति, वर्ग और स्थिति की दीवारें मिट जाती हैं — सभी श्रद्धालु एक ही घाट पर एकसमान भाव से सूर्य को नमन करते हैं। लोकगीतों की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा, और परिवारों की सामूहिक भागीदारी इस पर्व को एक जन-आंदोलन जैसी सांस्कृतिक अनुभूति बना देती है।


📻 ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि छठ पूजा भारतीय जीवनदर्शन का उत्कृष्ट उदाहरण है — जहाँ प्रकृति के प्रति आस्था, संस्कृति की निरंतरता और समाज की एकजुटता का अद्भुत मेल देखने को मिलता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पर्यावरण और सामाजिक चेतना का उत्सव है जो हमें “जीवन और प्रकृति के संतुलन” का पाठ सिखाता है।


🎉 उत्सव की झलक: भक्ति, बाजार और उत्साह

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा साझा किए गए दृश्यों में पूरे देशभर में छठ पर्व की तैयारियों का उल्लास देखा गया। बाजारों में सुप, दौरा, फल-फूल और पूजा सामग्री की रौनक, घाटों पर सुरक्षा और स्वच्छता की सजग व्यवस्था, और वातावरण में भक्ति संगीत की मधुर धुनें इस पर्व को अद्वितीय बनाती हैं।


🪔 निष्कर्ष: संस्कृति, समाज और प्रकृति का त्रिवेणी संगम

छठ महापर्व केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि यह भारतीय समाज की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है। यह हमें सिखाता है कि जब संस्कृति की गहराई, समाज की एकता और प्रकृति के प्रति श्रद्धा एक साथ आती है, तब एक ऐसी दिव्य ऊर्जा जन्म लेती है जो राष्ट्र को जोड़ती है। प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में इसकी चर्चा इस पर्व की राष्ट्रीय प्रासंगिकता और सार्वभौमिकता को और भी गहरा बनाती है।


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