
प्रस्तावना
27 अक्टूबर 2025 को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में एक ऐतिहासिक क्षण ने जन्म लिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप की मध्यस्थता में कंबोडिया और थाईलैंड ने वर्षों पुराने विवादों को समाप्त करते हुए शांति संधि पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता न केवल दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थायित्व की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, बल्कि यह वैश्विक कूटनीति में अमेरिका की सक्रिय वापसी का भी संकेत देता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीमा निर्धारण, जल संसाधन साझेदारी और ऐतिहासिक धरोहरों के स्वामित्व को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। विशेष रूप से प्रेह विहार मंदिर क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव 2023 में हिंसक झड़पों तक पहुँच गया था। इन बढ़ते तनावों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंतित किया और अमेरिका ने मध्यस्थता की पहल करते हुए दोनों देशों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया।
कुआलालंपुर में हस्ताक्षर समारोह
- स्थान: कुआलालंपुर, मलेशिया
- तिथि: 27 अक्टूबर 2025
- मुख्य हस्ताक्षरकर्ता:
- प्रधानमंत्री हुन मानेट (कंबोडिया)
- प्रधानमंत्री सेठा थाविसिन (थाईलैंड)
- राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप (संयुक्त राज्य अमेरिका)
मंच पर दोनों देशों के झंडे और “Cambodia–Thailand Peace Treaty – Malaysia 2025” का प्रतीकात्मक बैनर सजा हुआ था। समारोह में आसियान देशों के प्रतिनिधि, संयुक्त राष्ट्र अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी उपस्थित रहे।
संधि की मुख्य धाराएँ
- सीमा निर्धारण समझौता: दोनों देशों ने संयुक्त सर्वेक्षण के आधार पर स्थायी सीमा रेखा तय करने पर सहमति दी।
- संस्कृति और विरासत संरक्षण: प्राचीन मंदिरों और पुरातात्विक स्थलों की देखरेख अब दोनों देशों की साझा ज़िम्मेदारी होगी।
- आर्थिक सहयोग: सीमा क्षेत्रों में संयुक्त औद्योगिक गलियारे, व्यापारिक मार्ग और पर्यटन परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।
- सैन्य संयम: सीमा पर तैनात सेनाओं की संख्या कम की जाएगी और संयुक्त निगरानी दल गठित किया जाएगा।
- जल संसाधन प्रबंधन: मेकोंग नदी के जल वितरण के लिए एक द्विपक्षीय आयोग का गठन किया गया है, जो दोनों देशों के हितों की निगरानी करेगा।
अमेरिका की मध्यस्थ भूमिका
राष्ट्रपति ट्रंप ने हस्ताक्षर के बाद कहा —
“यह समझौता युद्ध की नहीं, बल्कि शांति की जीत है। अमेरिका दुनिया में स्थिरता और सहयोग का भागीदार बना रहेगा।”
यह पहल ट्रंप प्रशासन की “Peace Through Strength” नीति की भावना को दर्शाती है, जो सामरिक शक्ति और कूटनीति दोनों को समान महत्व देती है। विश्लेषकों का मानना है कि यह अमेरिका की एशिया में रणनीतिक पुनर्स्थापना का संकेत है, जो चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित कर सकती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
- संयुक्त राष्ट्र: महासचिव ने इस समझौते को “दक्षिण-पूर्व एशिया की शांति संरचना का आधार” बताया।
- आसियान (ASEAN): संगठन ने कहा कि यह उदाहरण क्षेत्रीय सहयोग और संवाद की शक्ति को दर्शाता है।
- विश्लेषक दृष्टिकोण: कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता एशिया में शक्ति संतुलन को नए सिरे से परिभाषित करेगा और भविष्य के क्षेत्रीय समझौतों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।
निष्कर्ष
कंबोडिया–थाईलैंड शांति संधि यह साबित करती है कि संवाद और सहयोग के माध्यम से वर्षों पुराने विवादों का समाधान संभव है। कुआलालंपुर में हुआ यह हस्ताक्षर समारोह न केवल दो देशों के लिए नई शुरुआत है, बल्कि यह पूरे एशियाई महाद्वीप के लिए एक प्रेरक संदेश भी देता है — शांति की राह हमेशा वार्ता से होकर जाती है।