
हर साल 31 अक्टूबर को भारत एक ऐसे महानायक को नमन करता है जिसने स्वतंत्र भारत को अखंड स्वरूप दिया — सरदार वल्लभभाई पटेल। यह दिन “राष्ट्रीय एकता दिवस” के रूप में मनाया जाता है, और इसका मुख्य आकर्षण बन चुका है “एकता के लिए दौड़” (Run for Unity) — एक ऐसी पहल जो देश के हर नागरिक को एक सूत्र में बांधने का प्रतीक बन चुकी है।
🛕 सरदार पटेल: एकता के मूर्त रूप
सरदार पटेल को इतिहास “भारत का लौह पुरुष” कहकर याद करता है। यह उपाधि केवल उनके दृढ़ व्यक्तित्व के कारण नहीं, बल्कि उनके असाधारण राजनीतिक कौशल और एकजुट भारत की रचना में उनकी निर्णायक भूमिका के लिए दी गई।
1947 में जब देश आज़ाद हुआ, तब भारत 562 रियासतों में बँटा हुआ था। उस समय पटेल ने अपने अद्भुत कूटनीतिक विवेक और अटूट इच्छाशक्ति से सभी रियासतों का भारत में विलय कराया।
उनकी सोच थी — “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” — जो आज भी हमारे राष्ट्रीय जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत बनी हुई है।
🏃♀️ “एकता के लिए दौड़”: एक आंदोलन, केवल आयोजन नहीं
“एकता के लिए दौड़” किसी साधारण कार्यक्रम से कहीं अधिक है। यह एक राष्ट्रीय आंदोलन है जो देश के कोने-कोने में फैले लोगों को जोड़ता है। विद्यार्थी, अधिकारी, किसान, खिलाड़ी—सब एक ही लक्ष्य के साथ कदम मिलाते हैं: राष्ट्रीय एकता का संदेश फैलाना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई यह पहल आज एक जनांदोलन का रूप ले चुकी है। हर वर्ष लाखों लोग इसमें भाग लेते हैं और सरदार पटेल की एकता की भावना को जीवंत करते हैं।
इस बार, सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर, यह आयोजन और भी भव्य स्वरूप में देशभर में मनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर #EktaDiwas, #RunForUnity और #SardarPatel150 जैसे हैशटैग देशभक्ति के प्रतीक बन चुके हैं।
🗿 “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी”: सरदार के सपनों का साकार रूप
गुजरात के केवड़िया में स्थित “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा है — 182 मीटर ऊँची यह प्रतिमा सरदार पटेल के आदर्शों की शाश्वत याद दिलाती है।
यह केवल एक स्थापत्य चमत्कार नहीं, बल्कि भारत की एकता, साहस और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। यह स्थल अब राष्ट्रीय गर्व और प्रेरणा का केंद्र बन चुका है, जहाँ हर आगंतुक को “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की अनुभूति होती है।
🌏 विविधता में एकता: भारत की आत्मा
भारत की पहचान उसकी विविधता में एकता से है — जहाँ अनेक भाषाएँ, धर्म और संस्कृतियाँ मिलकर एक सशक्त राष्ट्र बनाती हैं।
सरदार पटेल ने इसी विविधता को एकता की डोर में बाँधा था। आज “एकता के लिए दौड़” उसी भावना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम बन चुकी है। यह हमें याद दिलाती है कि मतभेदों से नहीं, सहयोग से राष्ट्र बनता है।
✨ निष्कर्ष
“एकता के लिए दौड़” केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय प्रतिज्ञा है। यह हमें स्मरण कराती है कि भारत की असली ताकत उसकी एकता, सहयोग और साझा संस्कृति में निहित है।
सरदार पटेल की दूरदृष्टि आज भी हमें प्रेरित करती है कि हम अपने छोटे-छोटे भेदभावों को त्यागकर एकजुट भारत के निर्माण में योगदान दें।
इस 31 अक्टूबर को, आइए हम सब मिलकर कदम बढ़ाएँ —
एकता के लिए, अखंड भारत के लिए, सरदार पटेल के आदर्शों के लिए। 🇮🇳