
उत्तर प्रदेश से सामने आया एक हालिया वीडियो एक बार फिर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर रहा है। वीडियो में एक गंभीर मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए बैलगाड़ी का सहारा लिया गया — क्योंकि एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक और जनमानस दोनों में गहरी प्रतिक्रिया का कारण बना।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर भाजपा सरकार पर करारा प्रहार किया और तंज कसते हुए इसे “बुल-बैलेंस मॉडल” कहा।
🚑 जब एंबुलेंस की जगह बनी बैलगाड़ी
भारत आज जहां “विकसित राष्ट्र” बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं यह दृश्य जमीनी सच्चाई का आइना दिखाता है। आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की बात करने वाले देश में अगर किसी बीमार व्यक्ति को बैलगाड़ी पर अस्पताल ले जाना पड़े, तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि एक व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बन जाती है।
📉 स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक तस्वीर
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत सैकड़ों एंबुलेंस सेवाएं संचालित की जाती हैं। लेकिन कई जिलों से लगातार शिकायतें आती रही हैं कि—
- एंबुलेंस देर से या बिल्कुल नहीं पहुंचती,
- तकनीकी खराबी और ईंधन की कमी से सेवाएं ठप हो जाती हैं,
- ग्रामीण इलाकों में वाहनों की संख्या बेहद सीमित है।
ऐसे में गरीब और दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों के पास मरीज को ले जाने के लिए कोई और विकल्प नहीं बचता।
🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और जन असंतोष
अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर ट्वीट करते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाया। उन्होंने तीखे व्यंग्य में कहा कि “अगर एंबुलेंस न मिलें तो मुख्यमंत्री जी दिल्ली से ड्रोन या टेलीस्कोप मंगाकर उन्हें खोज लें।”
यह टिप्पणी भले ही व्यंग्यात्मक हो, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश गहरा है — क्या राज्य सरकारें सिर्फ योजनाओं की घोषणा तक सीमित हैं, या जमीनी स्तर पर उनका कोई असर भी है?
🏥 सुधार के लिए जरूरी कदम
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए केवल घोषणाएं नहीं, ठोस कार्रवाई की जरूरत है। सरकार को चाहिए कि वह:
- ग्रामीण क्षेत्रों में एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ की संख्या बढ़ाए,
- सभी वाहनों की नियमित जांच और ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करे,
- हर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए स्थानीय अधिकारी जवाबदेह हों,
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को आधुनिक उपकरणों और संसाधनों से सुसज्जित किया जाए।
🔍 निष्कर्ष
बैलगाड़ी पर ले जाए जा रहे मरीज का यह दृश्य केवल एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। यह हमें याद दिलाता है कि प्रगति का अर्थ केवल अर्थव्यवस्था की रफ्तार नहीं, बल्कि आम नागरिक की बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच भी है।
अगर भारत को सच में विकसित राष्ट्र बनना है, तो स्वास्थ्य सेवा का ढांचा केवल रिपोर्टों में नहीं, बल्कि हर गांव और हर नागरिक के जीवन में सुधार लाना होगा।