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🌞 छठ महापर्व: श्रद्धा, पर्यावरण और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम


भारत की सभ्यता में ऐसे अनेक पर्व हैं जो केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन के गहरे दर्शन को प्रकट करते हैं। इन्हीं में से एक है — छठ महापर्व, जो बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के तराई क्षेत्रों में अटूट विश्वास और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य उपासना, प्रकृति-सम्मान और पारिवारिक एकजुटता का अनोखा प्रतीक है।


🌊 सूर्य और जल की आराधना का अनुष्ठान

छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्य देव और छठी मैया की उपासना को समर्पित है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से प्रारंभ होकर यह पर्व चार दिनों तक चलता है। इन दिनों में व्रती स्त्रियाँ (और कई पुरुष भी) निर्जला व्रत रखकर शुद्धता, संयम और साधना का पालन करती हैं।
वे अस्ताचलगामी और उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की समृद्धि, संतान की दीर्घायु और लोकमंगल की कामना करती हैं।


📸 श्रद्धा का जनसमुद्र

हाल ही में समाजवादी नेता अखिलेश यादव द्वारा साझा की गई छठ पर्व की तस्वीरों ने इस परंपरा की जीवंतता को पुनः उजागर किया। हजारों श्रद्धालु जब नदी या तालाब के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं, तो वह दृश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सामूहिक चेतना का भी सशक्त प्रदर्शन होता है।
प्रकृति की कठोर परिस्थितियों — चाहे ठंड हो या बारिश — के बावजूद लोगों का उत्साह अडिग रहता है।


🌿 प्रकृति के प्रति आदर का संदेश

छठ महापर्व का मूल सार है — प्रकृति के प्रति कृतज्ञता। इस पर्व में प्रयुक्त सभी वस्तुएँ प्राकृतिक होती हैं: मिट्टी के दीपक, केले के पत्ते, गन्ना, नारियल, और मौसमी फल।
यह त्योहार मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व की भावना को सशक्त करता है और यह सिखाता है कि प्रकृति का संरक्षण ही जीवन का स्थायित्व है।


👨‍👩‍👧‍👦 सामाजिक समरसता और पारिवारिक सहभागिता

छठ महापर्व केवल व्रती का नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज का पर्व है।
व्रती महिला उपवास रखती हैं, परिवार उनका सहयोग करता है, बच्चे उल्लास से भाग लेते हैं, और पूरा मोहल्ला एक साथ जुटता है।
जाति, धर्म या वर्ग की दीवारें इस अवसर पर अप्रासंगिक हो जाती हैं — यही है भारतीय समाज की आत्मा: “साझा संस्कृति, साझा भाव”


🛡️ व्यवस्था और आधुनिक चुनौतियाँ

हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु घाटों पर पहुंचते हैं, जिससे प्रशासन के सामने स्वच्छता, सुरक्षा और यातायात जैसी चुनौतियाँ आती हैं।
हाल के वर्षों में कई राज्य सरकारों ने विशेष घाटों का निर्माण, मेडिकल कैम्प, मोबाइल हेल्थ यूनिट्स और स्वच्छता अभियान जैसी योजनाएँ लागू की हैं, जो आधुनिक प्रबंधन के साथ परंपरा का संतुलन बनाए रखती हैं।


🙏 निष्कर्ष: प्रकाश की ओर अग्रसर जीवन दर्शन

छठ महापर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन, प्रकृति और सामाजिक चेतना का जीवंत उत्सव है।
यह पर्व हमें सिखाता है कि संयम, सहयोग और श्रद्धा के माध्यम से जीवन के अंधकार को दूर किया जा सकता है।
जैसे सूर्य की किरणें हर दिशा में प्रकाश फैलाती हैं, वैसे ही छठ हमें सकारात्मकता, निष्ठा और समरसता की ओर प्रेरित करता है।


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