
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2025 — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance – ISA) की आठवीं सभा का उद्घाटन करते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब वैश्विक ऊर्जा संक्रमण के केंद्र में है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “सूर्य केवल प्रकाश का नहीं, बल्कि मानवता के उज्ज्वल भविष्य का भी प्रतीक है।”
यह आयोजन भारत की राजधानी नई दिल्ली में हुआ, जहां सौर ऊर्जा को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नवाचार और वित्तीय समावेशन पर चर्चा के लिए 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि एकत्र हुए।
🌍 ISA: एक वैश्विक पहल, जिसकी जड़ें भारत में
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की शुरुआत वर्ष 2015 में भारत और फ्रांस की संयुक्त पहल से हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य उन देशों को एक साझा मंच प्रदान करना है जो सूर्य की किरणों से संपन्न हैं, ताकि वे सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग कर सकें। यह गठबंधन विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के देशों को सशक्त बनाने का कार्य कर रहा है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु न्याय दोनों को गति मिले।
🇮🇳 भारत की भूमिका: “सूर्य मित्र” से “वैश्विक मार्गदर्शक” तक
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में न केवल अपनी क्षमताओं को विकसित किया है, बल्कि अन्य देशों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने बीते दस वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन को कई गुना बढ़ाया है और अब वह सौर प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण और नीति सहयोग के क्षेत्र में भी अग्रणी बन चुका है।
भारत की पहल ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड (One Sun, One World, One Grid)’ को राष्ट्रपति ने एक ऐसे दृष्टिकोण के रूप में बताया जो ऊर्जा न्याय और वैश्विक एकता दोनों को साधता है।
🔋 जलवायु परिवर्तन के खिलाफ साझा प्रयास
सभा में अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप समूह के देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चाओं का केंद्र रहा —
- सौर ऊर्जा निवेश को प्रोत्साहन देना,
- नवाचार तकनीकों को साझा करना, और
- सौर परियोजनाओं को ग्रामीण व कृषि क्षेत्रों तक पहुँचाना।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि “जलवायु परिवर्तन की चुनौती किसी एक देश की नहीं है, इसलिए समाधान भी सामूहिक होना चाहिए। ISA इस एकजुटता की दिशा में आशा का स्तंभ है।”
📈 भविष्य की योजनाएँ और नई पहलें
आठवीं सभा के दौरान ISA ने कई नई योजनाओं की घोषणा की, जिनमें प्रमुख हैं —
- सौर स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने हेतु एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कोष की स्थापना,
- ग्रामीण भारत और विकासशील देशों में सौर आधारित सिंचाई पंपों का प्रसार,
- ऊर्जा भंडारण (बैटरी) तकनीक में अनुसंधान सहयोग,
- और सदस्य देशों के लिए नीति सलाह, प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण कार्यक्रम।
✨ निष्कर्ष: भारत का नेतृत्व, दुनिया की दिशा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह उद्घाटन संबोधन भारत की उस वैश्विक पहचान को और सुदृढ़ करता है, जिसमें वह अब केवल ऊर्जा क्रांति का सहभागी नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता बन चुका है।
ISA की यह सभा इस बात का प्रमाण है कि सौर ऊर्जा केवल तकनीकी विकल्प नहीं, बल्कि एक हरित, समावेशी और टिकाऊ भविष्य की दिशा में मानवता का साझा संकल्प है।