
भारतीय महिला क्रिकेट टीम का दबदबा अब वैश्विक स्तर पर और भी स्पष्ट नज़र आ रहा है। ICC की ताज़ा वनडे बल्लेबाज़ी रैंकिंग में स्मृति मंधाना ने शीर्ष स्थान हासिल कर एक नया अध्याय रचा है, जबकि युवा बल्लेबाज़ प्रतिका रावत ने पहली बार शीर्ष 30 में जगह बनाकर भारतीय क्रिकेट के भविष्य की झलक पेश की है।
🌟 स्मृति मंधाना: क्लास और निरंतरता का संगम
स्मृति मंधाना आज भारतीय महिला क्रिकेट का चेहरा हैं। हाल ही में न्यूज़ीलैंड और बांग्लादेश के खिलाफ शानदार पारियां खेलने के बाद उन्होंने ICC वनडे बल्लेबाज़ी रैंकिंग में नंबर 1 का स्थान बरकरार रखा है। मंधाना की बल्लेबाज़ी में तकनीक, टाइमिंग और आत्मविश्वास का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है।
📊 मुख्य उपलब्धियाँ:
- न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 87 और 102 रनों की यादगार पारियां
- बांग्लादेश के खिलाफ निर्णायक अर्धशतक
- पिछले एक वर्ष में औसत 53.40 और स्ट्राइक रेट 89.10
उनकी यह निरंतरता बताती है कि वह केवल बल्लेबाज़ नहीं, बल्कि भारत की क्रिकेट सोच की पहचान बन चुकी हैं।
🚀 प्रतिका रावत: नई पीढ़ी की प्रेरणा
उत्तराखंड से आने वाली युवा बल्लेबाज़ प्रतिका रावत ने हालिया ICC रैंकिंग में जबरदस्त छलांग लगाई है। वह अब शीर्ष 30 में शामिल हैं, जो किसी भी नवोदित खिलाड़ी के लिए असाधारण उपलब्धि है। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद, श्रीलंका के खिलाफ वनडे श्रृंखला में उन्होंने दो बेहतरीन अर्धशतक जमाकर चयनकर्ताओं और प्रशंसकों दोनों को प्रभावित किया।
📊 मुख्य उपलब्धियाँ:
- श्रीलंका के खिलाफ 58 और 74 रनों की शानदार पारियां
- घरेलू सत्र में 600 से अधिक रन
- रैंकिंग में 34वें से सीधे 29वें स्थान पर पहुंचीं
प्रतिका का यह उदय इस बात का प्रमाण है कि भारतीय महिला क्रिकेट की अगली पीढ़ी कितनी तैयार और आत्मविश्वासी है।
🌍 वैश्विक रैंकिंग में अन्य परिवर्तन
ICC महिला वनडे रैंकिंग में अन्य देशों की प्रमुख खिलाड़ियों में भी हलचल रही: खिलाड़ी देश रैंकिंग में परिवर्तन एमी सैटरथवेट न्यूज़ीलैंड +2 स्थान टैमी ब्यूमोंट इंग्लैंड -1 स्थान लौरा वोल्वार्ड्ट दक्षिण अफ्रीका स्थिर स्थिति
(स्रोत: ICC Women’s Championship 2025 – नवीनतम अपडेट)
🇮🇳 भारतीय महिला क्रिकेट: एक संगठित क्रांति
स्मृति मंधाना की शीर्ष स्थिति और प्रतिका रावत का तेज़ उभार केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं हैं—यह भारत की संगठित क्रिकेट प्रणाली की शक्ति का परिणाम है। घरेलू ढांचे में सुधार, खिलाड़ियों को निरंतर अवसर और कोचिंग स्टाफ की रणनीतिक सोच ने भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना दिया है।
आज भारत की महिला टीम केवल मुकाबले नहीं जीत रही, बल्कि नई पीढ़ी की प्रेरणा बन रही है — एक ऐसी टीम जो अनुशासन, आत्मविश्वास और सामूहिक दृष्टिकोण से विश्व क्रिकेट में अपना स्वर्ण युग लिख रही है।