
भारत का लोकतंत्र तभी सशक्त बनता है, जब उसके नागरिक जागरूक, उत्तरदायी और सक्रिय हों। इस दिशा में “मॉडल युवा ग्राम सभा” जैसी पहल युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित करने का एक अभिनव माध्यम बन रही है। यह कार्यक्रम केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि भविष्य के सुशासक नागरिक तैयार करने की प्रयोगशाला है।
🌱 पहल का उद्देश्य
मॉडल युवा ग्राम सभा का मूल लक्ष्य यह है कि विद्यालयों के छात्र–छात्राएँ लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करें। इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:
- विद्यार्थियों को ग्राम सभा की प्रक्रिया और निर्णय लेने की प्रणाली से परिचित कराना।
- युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और सहभागिता की भावना जगाना।
- उन्हें नेतृत्व, संवाद और सहमति निर्माण की कला सिखाना।
🧩 मॉडल युवा ग्राम सभा क्या है?
यह एक शैक्षणिक अभ्यास है, जिसमें स्कूल के छात्र ग्राम सभा का अनुकरण करते हैं। विद्यार्थी सरपंच, सचिव, सदस्य आदि की भूमिकाएँ निभाते हुए स्थानीय या काल्पनिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। इस प्रक्रिया में वे नीतिनिर्माण, समस्या विश्लेषण और सहयोगात्मक निर्णय का अभ्यास करते हैं।
यह मंच बच्चों को यह सिखाता है कि “लोकतंत्र केवल चुनाव नहीं, बल्कि संवाद, सहभागिता और जिम्मेदारी की संस्कृति है।”
🎯 मुख्य लाभ और प्रभाव
- लोकतांत्रिक मूल्यों का अभ्यास:
छात्र संविधान, पंचायती राज और नागरिक कर्तव्यों की व्यावहारिक समझ प्राप्त करते हैं। - आत्मविश्वास और संवाद कौशल में वृद्धि:
सार्वजनिक मंच पर विचार रखना बच्चों को निर्भीक और स्पष्ट वक्ता बनाता है। - सामाजिक जागरूकता:
विद्यार्थी समाज की वास्तविक समस्याओं से परिचित होते हैं और समाधान की दिशा में सोचने लगते हैं। - नेतृत्व विकास:
यह पहल भविष्य के ऐसे युवाओं को तैयार करती है जो समाज और राष्ट्र के उत्थान में सार्थक योगदान दे सकें।
🏫 विद्यालय और शिक्षकों की भूमिका
विद्यालयों को इस पहल को शिक्षा के अंग के रूप में अपनाना चाहिए। शिक्षक बच्चों को न केवल ग्राम सभा की संरचना सिखाएँ, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित करें कि वे खुलकर अपने विचार रखें और दूसरों की राय का सम्मान करें। इस संवादात्मक वातावरण से छात्र वास्तविक लोकतांत्रिक संस्कार ग्रहण करते हैं।
🌟 लोकतंत्र के भविष्य की ओर एक कदम
मॉडल युवा ग्राम सभा लोकतंत्र की जड़ों को मज़बूत करने का बीजारोपण है। जब विद्यालय स्तर पर ही बच्चे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से रूबरू होते हैं, तो आगे चलकर वे अधिक संवेदनशील, जिम्मेदार और रचनात्मक नागरिक बनते हैं।
यही वे युवा हैं जो आने वाले समय में एक जागरूक, सशक्त और समावेशी भारत के निर्माण की रीढ़ बनेंगे।