
भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) ने अपने अगले बड़े प्रक्षेपण मिशन LVM3-M5 (Launch Vehicle Mark-3 Mission 5) की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह उड़ान 2 नवम्बर 2025 (रविवार) को शाम 5:26 बजे (भारतीय समयानुसार) श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रस्तावित है।
यह मिशन भारत के अंतरिक्ष अभियानों की श्रृंखला में एक और ऐतिहासिक पड़ाव साबित होगा, क्योंकि यह LVM3 रॉकेट का पाँचवाँ परिचालन (Operational) प्रक्षेपण है।
🌌 LVM3-M5: भारत का भरोसेमंद हेवी-लिफ्ट लॉन्चर
LVM3-M5, जिसे पहले GSLV Mk-III के नाम से जाना जाता था, इसरो का सबसे शक्तिशाली और भरोसेमंद प्रक्षेपण यान है। यह वही रॉकेट है जिसने चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 जैसे ऐतिहासिक मिशनों को अंतरिक्ष में पहुँचाया था।
मुख्य तकनीकी विवरण:
- ऊंचाई: 43.5 मीटर
- लिफ्ट-ऑफ द्रव्यमान (Mass): 642 टन
- स्टेज (Stages):
- 🔸 2 × S200 सॉलिड (ठोस ईंधन बूस्टर)
- 🔸 L110 लिक्विड (तरल ईंधन स्टेज)
- 🔸 C25 क्रायोजेनिक (अत्यधिक ठंडा हाइड्रोजन-ऑक्सीजन इंजन)
इस तीन-स्तरीय प्रणाली के माध्यम से LVM3 अत्यधिक भारी उपग्रहों और अंतरिक्ष मिशनों को पृथ्वी की कक्षा (Orbit) में स्थापित करने में सक्षम है।
⚙️ LVM3-M5 की प्रमुख विशेषताएँ
पैरामीटर विवरण कुल ऊंचाई 43.5 मीटर लिफ्ट-ऑफ मास 642 टन स्ट्रैप-ऑन बूस्टर 2 × S200 कोर स्टेज L110 (UH25 + N2O4 तरल ईंधन) ऊपरी स्टेज C25 (Liquid Hydrogen + Liquid Oxygen) GTO अपोजी 29970 ± 3700 किमी झुकाव (Inclination) 21.4° ± 0.1°
🛰️ LVM3-M5 मिशन का उद्देश्य
हालांकि इसरो ने अभी मिशन पेलोड (Payload) का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कम्युनिकेशन या नेविगेशन सैटेलाइट को भू-स्थिर कक्षा (Geostationary Orbit) में स्थापित करेगा।
LVM3 की यह उड़ान भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान (गगनयान) और भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए तकनीकी आधार को और मजबूत बनाएगी।
🇮🇳 भारत की अंतरिक्ष यात्रा में नया अध्याय
LVM3-M5 न केवल भारत की अंतरिक्ष प्रक्षेपण क्षमताओं को नई ऊँचाई देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर इसरो की साख को और भी सुदृढ़ करेगा। इसरो की योजनाएँ केवल उपग्रह प्रक्षेपण तक सीमित नहीं, बल्कि वह वाणिज्यिक लॉन्चिंग सेवाओं, मानव मिशनों और अंतरग्रहीय अभियानों में अग्रणी बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
🌠 निष्कर्ष
LVM3-M5 की यह उड़ान भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता की एक और मिसाल बनने जा रही है।
2 नवम्बर 2025 की शाम जब यह रॉकेट आसमान की ओर बढ़ेगा, तब पूरा भारत गर्व से एक और उपलब्धि का गवाह बनेगा — यह दर्शाता हुआ कि भारत न केवल चाँद और मंगल तक पहुँचा है, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान के भविष्य को आकार देने की क्षमता रखता है।