
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक फर्जी लोन घोटाले का पर्दाफाश किया है। दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर पुलिस स्टेशन टीम ने पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो बैंक अधिकारियों के रूप में खुद को पेश कर लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपये हड़प रहे थे।
🚨 ठगी का तरीका
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह लोगों को आसान लोन दिलाने का झांसा देकर संपर्क करता था। आरोपी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करते और पीड़ितों से “वेरिफिकेशन” के नाम पर उनकी बैंक डिटेल्स और ओटीपी हासिल कर लेते थे। इसके बाद तकनीकी तरीकों से उनके खातों से पैसे उड़ा दिए जाते थे।
इस गिरोह ने अब तक करीब ₹11.95 लाख की ठगी की है।
👮♂️ पुलिस की सटीक तकनीकी ट्रेसिंग
यह कार्रवाई एसएचओ (साइबर) इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में की गई। पुलिस टीम ने आधुनिक तकनीकी ट्रेसिंग के माध्यम से आरोपियों की पहचान की और उन्हें धर दबोचा।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 8 स्मार्टफोन भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी की वारदातों में किया जा रहा था।
⚖️ साइबर अपराधों पर दिल्ली पुलिस की सतर्कता
दिल्ली पुलिस का यह ऑपरेशन न केवल एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह आम नागरिकों के लिए एक चेतावनी भी है कि ऑनलाइन लोन या बैंक कॉल के नाम पर आने वाली किसी भी संदिग्ध कॉल पर विश्वास न करें।
साइबर अपराधी आजकल तकनीकी ज्ञान का दुरुपयोग कर लोगों की मेहनत की कमाई को निशाना बना रहे हैं।
🔐 नागरिकों के लिए सावधानी के सुझाव
- किसी भी कॉल पर अपने बैंक खाते की जानकारी या ओटीपी साझा न करें।
- केवल बैंकों की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से ही लोन से जुड़ी प्रक्रियाएं करें।
- किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या www.cybercrime.gov.in पर दर्ज कराएं।
🏅 निष्कर्ष
दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक और उनकी टीम ने तकनीकी दक्षता और सतर्कता का परिचय देते हुए न केवल अपराधियों को पकड़ा बल्कि यह भी साबित किया कि साइबर अपराध जितना आधुनिक हो, कानून उससे कहीं अधिक सतर्क और सक्षम है।