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छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष : राज्योत्सव से विकास की नई उड़ान तक


भारत के संघीय ढांचे में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है जिसने अपनी स्थापना के बाद से ही प्रगति, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया है। 1 नवम्बर 2000 को मध्यप्रदेश से पृथक होकर बने इस राज्य ने वर्ष 2023 में अपना 25वां स्थापना दिवस अत्यंत धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायपुर में आयोजित राज्योत्सव समारोह में भाग लिया और करीब ₹14,260 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया।


🎉 राज्योत्सव का सार्थक महत्व

छत्तीसगढ़ के गठन का उद्देश्य था — जनजातीय, ग्रामीण और पिछड़े इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना।
पिछले ढाई दशकों में राज्य ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, खनिज, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
राज्योत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि यह बीते वर्षों की उपलब्धियों का मूल्यांकन और आने वाले समय की दिशा तय करने का अवसर है।


🏗️ प्रधानमंत्री की घोषणाएँ और नई परियोजनाएँ

राज्योत्सव के मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ के भविष्य को नई दिशा देने वाली कई योजनाओं की घोषणा की, जिनमें प्रमुख हैं –


🌱 आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता की राह

इन परियोजनाओं से न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि रोज़गार और उद्यमिता के अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
कृषि, वन और खनिज आधारित उद्योगों को बेहतर सड़क, बिजली और संचार सुविधाओं से सीधा लाभ प्राप्त होगा।
प्रधानमंत्री ने पीएम विश्वकर्मा योजना और स्वयं रोजगार एवं उद्यमिता कार्यक्रम (SVEP) के माध्यम से स्थानीय कारीगरों, लघु उद्यमियों और युवाओं को सशक्त बनाने का भी आह्वान किया।


🎭 संस्कृति, परंपरा और आधुनिकता का संगम

छत्तीसगढ़ अपनी लोककला, नृत्य, गीत-संगीत और जनजातीय परंपराओं के लिए विख्यात है। राज्योत्सव में इन सांस्कृतिक रंगों का भव्य प्रदर्शन राज्य की पहचान को और प्रखर बनाता है।
यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत जब एक साथ चलते हैं, तो प्रगति की राह और भी सुगम हो जाती है।
आगामी वर्षों में छत्तीसगढ़ का लक्ष्य है — हरित ऊर्जा, डिजिटल नवाचार, औद्योगिक विविधीकरण और समावेशी विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनना।


✍️ निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ का 25वां स्थापना दिवस केवल अतीत की उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य की नई संभावनाओं और प्रतिबद्धताओं का उद्घोष है।
प्रधानमंत्री द्वारा आरंभ की गई योजनाएँ राज्य को आत्मनिर्भरता, समग्र विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में अग्रसर करेंगी।
यह अवसर हमें यह भी याद दिलाता है कि जब परंपरा और प्रगति साथ चलते हैं, तो कोई भी राज्य विकास का आदर्श मॉडल बन सकता है।


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