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राजनाथ सिंह और फान वान जियांग की मुलाकात : भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी को नई दिशा

कुआलालंपुर में आयोजित आसियान (ASEAN) रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वियतनाम के रक्षा मंत्री फान वान जियांग (Phan Van Giang) के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकात हुई। यह मुलाकात न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अहम रही, बल्कि भारत-वियतनाम के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग की दिशा में एक और मजबूत कदम के रूप में देखी जा रही है।

🌏 बैठक का संदर्भ

राजनाथ सिंह इन दिनों मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में चल रही ASEAN Defence Ministers’ Meeting (ADMM-Plus) में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस मंच पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख देशों के रक्षा मंत्री क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आतंकवाद निरोध और तकनीकी साझेदारी जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।

🤝 द्विपक्षीय संबंधों को मिला बल

राजनाथ सिंह ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) खाते पर साझा की गई पोस्ट में लिखा –

“Happy to have met the Defence Minister Phan Van Giang in Kuala Lumpur.”

इस संदेश के साथ साझा की गई तस्वीर में दोनों नेता सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह मुलाकात भारत और वियतनाम के बीच वर्षों से चले आ रहे रक्षा संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

⚙️ रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि

भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग 2000 के दशक की शुरुआत से लगातार गहराता गया है। दोनों देशों ने नौसैनिक प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग में सहयोग और संयुक्त अभ्यासों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

🇮🇳 भारत की एक्ट ईस्ट नीति और वियतनाम की भूमिका

वियतनाम, भारत की “Act East Policy” का एक अहम स्तंभ है। इस नीति के तहत भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत कर रहा है। वियतनाम, न केवल ASEAN में बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी भारत का विश्वसनीय सहयोगी बनकर उभरा है।

🌺 निष्कर्ष

कुआलालंपुर में हुई यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक वार्ता नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का संकेत है। भारत और वियतनाम दोनों ऐसे समय में अपने सहयोग को गहरा कर रहे हैं जब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है।
राजनाथ सिंह और फान वान जियांग की यह बैठक आने वाले वर्षों में रक्षा, तकनीकी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।

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