
तेलंगाना के गडवाल ज़िले के धर्मावरम क्षेत्र में स्थित बीसी रेज़िडेंशियल बॉयज़ स्कूल में हाल ही में हुई खाद्य विषाक्तता (फूड पॉइज़निंग) की घटना ने एक बार फिर आवासीय विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर चिंता गहरी कर दी है। इस हादसे में लगभग 52 छात्र बीमार पड़ गए, जिन्हें उल्टी, मितली और पेट दर्द जैसी शिकायतों के बाद उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया।
🔹 घटना का विवरण
शुक्रवार की शाम छात्रावास में रात का भोजन करने के तुरंत बाद कई विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ने लगी। प्रारंभिक रूप से 30 छात्रों को अस्पताल भेजा गया, लेकिन अगले दो दिनों में यह संख्या बढ़कर 52 तक पहुँच गई।
सभी छात्रों का इलाज गडवाल के सरकारी अस्पताल में किया गया, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि अब उनकी हालत स्थिर है।
विद्यालय में लगभग 110 छात्र निवास करते हैं, जिनमें से अन्य छात्रों की भी प्राथमिक जाँच कर उन्हें छुट्टी दे दी गई।
🔹 प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया
घटना के तुरंत बाद ज़िला प्रशासन हरकत में आया।
- भोजन के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
- विद्यालय की रसोई, भंडारण कक्ष और जलापूर्ति की सफाई की विशेष समीक्षा की जा रही है।
- अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की जाए।
मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने स्वयं अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी प्रभावित बच्चों को सर्वोत्तम चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
🔹 व्यापक संदेश : एक प्रणालीगत समस्या
यह घटना किसी एक विद्यालय की त्रुटि नहीं, बल्कि पूरे शैक्षणिक तंत्र के लिए एक चेतावनी संकेत है।
भारत में अनेक आवासीय विद्यालयों में भोजन और स्वच्छता को लेकर लापरवाही के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं। इसलिए—
- खाद्य सुरक्षा निरीक्षण : विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था की नियमित और पारदर्शी जाँच अनिवार्य की जानी चाहिए।
- स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली : छात्रों के स्वास्थ्य की समय-समय पर चिकित्सीय जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- जवाबदेही तय करना : विद्यालय प्रशासन, रसोई कर्मचारी और ठेकेदार—सभी की जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए।
🔹 निष्कर्ष
गडवाल की यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हमें यह सिखाती है कि बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता।
शिक्षा केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास का माध्यम है — और इसके लिए पौष्टिक, स्वच्छ एवं सुरक्षित भोजन अत्यंत आवश्यक है।
यदि प्रशासन और समाज समय रहते ठोस कदम नहीं उठाते, तो ऐसी घटनाएँ भविष्य में और अधिक भयावह रूप ले सकती हैं।