
नैनीताल स्थित कुमाऊँ विश्वविद्यालय का 20वां दीक्षांत समारोह एक अविस्मरणीय अवसर बन गया, जब भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस विशेष अवसर ने न केवल विश्वविद्यालय परिवार को गौरवान्वित किया, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध शैक्षिक, सांस्कृतिक और नैतिक परंपराओं को नई दिशा दी।
🎓 राष्ट्रपति का शिक्षा पर प्रेरक संदेश
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि यह जीवन मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक उत्तरदायित्वों को आत्मसात करने का मार्ग है। उन्होंने जोर दिया कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण होना चाहिए जो ज्ञान के साथ चरित्र और करुणा में भी अग्रणी हों तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।
🌿 उत्तराखंड की संभावनाओं पर बल
राष्ट्रपति ने उत्तराखंड की युवा शक्ति की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदेश शिक्षा, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए आदर्श बन सकता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति की गोद में स्थित यह विश्वविद्यालय न केवल अकादमिक विकास का केंद्र है, बल्कि यह सांस्कृतिक समरसता और पर्यावरणीय चेतना का भी प्रतीक है।
👩🎓 विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का क्षण
समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध छात्रों को उपाधियाँ एवं स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। राष्ट्रपति ने पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियाँ व्यक्तिगत सफलता से आगे जाकर समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा बनती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे सदैव अपने ज्ञान का उपयोग लोकहित और मानवता की सेवा में करें।
🌏 वैश्विक दृष्टिकोण की आवश्यकता
राष्ट्रपति मुर्मु ने यह भी कहा कि वर्तमान युग में शिक्षा का दायरा सीमित नहीं रह सकता। विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण, नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में अग्रणी बनने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे भारत को ज्ञान-आधारित विश्व नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने में योगदान दें।
✨ निष्कर्ष
कुमाऊँ विश्वविद्यालय का यह 20वां दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह संवेदनशील नेतृत्व, शिक्षा के मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का प्रतीक बना। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का प्रेरणादायी संदेश निश्चय ही विद्यार्थियों, शिक्षकों और पूरे प्रदेश के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा, जो भविष्य में विश्वविद्यालय को और ऊँचाइयों तक ले जाने का संबल बनेगा।