
रूस-यूक्रेन युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध अब बंदूकों और टैंकों तक सीमित नहीं रहा। तकनीक, विशेषकर ड्रोन और मानवरहित प्रणालियाँ, अब रणनीति का केंद्र बन चुकी हैं। हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने घोषणा की कि देश की नई सैन्य संरचना में “Unmanned Systems Forces” यानी मानवरहित प्रणालियों की सेना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
🔹 युद्ध का नया चेहरा
- मानवरहित प्रणालियाँ अब निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमलों के लिए अनिवार्य हो गई हैं।
- ये सैनिकों की जान जोखिम में डाले बिना दुश्मन के ठिकानों पर वार करने की क्षमता रखती हैं।
- रियल-टाइम डेटा के आधार पर निर्णय लेने में ये तकनीकें निर्णायक साबित हो रही हैं।
🔹 “Magyar’s Birds” ब्रिगेड की अहम भूमिका
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने हाल ही में 414वीं ब्रिगेड “Magyar’s Birds” का दौरा किया, जो ड्रोन संचालन में अग्रणी मानी जाती है।
- उन्होंने वहां सेवा दे रहे सैनिकों को राज्य सम्मान प्रदान किए।
- ब्रिगेड की रणनीति, अनुशासन और भविष्य की योजनाओं पर गहन चर्चा की।
- AWOL (अनुशासनहीनता या बिना अनुमति अनुपस्थिति) जैसी समस्याओं पर भी सुधार की दिशा में विचार हुआ।
🔹 स्वदेशी ड्रोन निर्माण की दिशा में कदम
यूक्रेन अब विदेशी ड्रोन पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
- इससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और युद्ध के दौरान त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
- स्वदेशी तकनीक के विकास से न केवल लागत घटेगी बल्कि नवाचार को भी बल मिलेगा।
🔹 वैश्विक प्रभाव
- यूक्रेन की यह पहल केवल उसकी सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध की वैश्विक सोच को भी प्रभावित कर रही है।
- कई देश अब यूक्रेन के अनुभवों से प्रेरणा लेकर अपने रक्षा तंत्र में मानवरहित प्रणालियाँ शामिल कर रहे हैं।
- आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह तकनीक-केंद्रित हो सकता है।
🔹 निष्कर्ष
यूक्रेन की “Unmanned Systems Forces” केवल एक सैन्य इकाई नहीं, बल्कि भविष्य के युद्ध की परिकल्पना है।
यह दर्शाता है कि जब कोई देश साहस, नवाचार और दूरदर्शिता के साथ कदम उठाता है, तो वह न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करता है, बल्कि युद्ध की परिभाषा ही बदल देता है।