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📺 ट्रंप की टिप्पणी और अमेरिकी मीडिया रेटिंग्स पर उठती नई बहस


अमेरिका की राजनीति और मीडिया जगत का रिश्ता हमेशा से टकराव और आकर्षण के बीच झूलता रहा है। हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में एमएसएनबीसी (MSNBC) और उसके लोकप्रिय शो होस्ट जो स्कारबरो को निशाने पर लिया। उन्होंने चैनल की गिरती रेटिंग्स पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह शो अब “डाउन द ट्यूब्स” जा चुका है — यानी पूरी तरह नीचे गिर रहा है। ट्रंप ने इसे “देखने लायक खूबसूरत नज़ारा” बताया। इस बयान ने न सिर्फ मीडिया जगत में हलचल मचा दी, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का नया दौर शुरू कर दिया।


📰 रेटिंग्स बनाम राजनीति: मीडिया की साख पर सवाल


🔍 विश्लेषण: क्या रेटिंग्स ही पत्रकारिता की कसौटी हैं?


🌍 वैश्विक दृष्टिकोण

यह परिघटना सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। दुनियाभर में राजनीति और मीडिया के बीच इसी तरह की खींचतान देखी जाती है। भारत, ब्रिटेन या यूरोप—हर जगह नेता चैनलों की टीआरपी, एजेंडा और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं। यह प्रवृत्ति दिखाती है कि लोकतंत्र में मीडिया और सत्ताधारी वर्ग के बीच संवाद और संघर्ष — दोनों का सह-अस्तित्व बना रहेगा।


✍️ निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणी अमेरिकी मीडिया और राजनीति के बीच पुरानी तनातनी का नया अध्याय है। रेटिंग्स चाहे गिरें या बढ़ें, असली चुनौती वही है — क्या मीडिया जनता को तथ्यपूर्ण, निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता प्रदान कर पा रहा है?
लोकतंत्र की नींव सिर्फ सत्ता या विपक्ष से नहीं, बल्कि सच्ची और विश्वसनीय जानकारी से मजबूत होती है।


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