
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि वे यूरोपीय संघ (EU) और दक्षिण अमेरिकी देशों के संगठन मर्कोसुर (Mercosur) के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। उनका कहना है कि वे फ्रांसीसी किसानों के हितों और पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। यह रुख फ्रांस की कृषि नीति की दिशा और यूरोप–लैटिन अमेरिका संबंधों के बदलते स्वरूप दोनों को उजागर करता है।
🌎 मर्कोसुर समझौते की पृष्ठभूमि
मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका के चार प्रमुख देशों — अर्जेंटीना, ब्राज़ील, पराग्वे और उरुग्वे — का एक आर्थिक गठबंधन है।
यूरोपीय संघ और मर्कोसुर के बीच प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य है:
- व्यापारिक अवरोधों को कम करना,
- वस्तुओं और सेवाओं के आदान–प्रदान को बढ़ावा देना,
- और दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक सहयोग को सशक्त बनाना।
यदि यह समझौता लागू होता है, तो यूरोपीय बाज़ार में लैटिन अमेरिकी कृषि उत्पादों की आसान पहुँच संभव होगी, वहीं मर्कोसुर देशों को यूरोप में अपने औद्योगिक उत्पादों के लिए व्यापक अवसर मिलेंगे।
🚜 फ्रांस की प्रमुख चिंता: कृषि क्षेत्र की सुरक्षा
फ्रांस यूरोप का कृषि क्षेत्र में अग्रणी देश है, इसलिए इस समझौते को लेकर उसके किसानों की चिंता स्वाभाविक है।
- किसानों का मानना है कि दक्षिण अमेरिकी देशों के सस्ते कृषि उत्पाद यूरोपीय बाज़ार में प्रवेश पाकर उनकी प्रतिस्पर्धा को कमजोर कर सकते हैं।
- साथ ही, उत्पादन लागत और पर्यावरणीय मानकों में दोनों क्षेत्रों के बीच भारी अंतर है।
- मैक्रों ने स्पष्ट कहा है कि वे ऐसा कोई समझौता मंज़ूर नहीं करेंगे जो फ्रांसीसी किसानों की आय या आजीविका को जोखिम में डाले।
🌱 पर्यावरण और स्थिर विकास का पहलू
फ्रांस केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के संदर्भ में भी इस समझौते की समीक्षा करना चाहता है।
- मैक्रों का ज़ोर है कि समझौते में ऐसे नियम जोड़े जाएँ जो वनों की कटाई और पर्यावरणीय क्षति को रोकें।
- फ्रांस यह सुनिश्चित करना चाहता है कि व्यापार नीति जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों के अनुरूप हो और टिकाऊ विकास के सिद्धांतों पर आधारित रहे।
🤝 कूटनीतिक दृष्टि से संतुलन
मैक्रों का रुख यह दिखाता है कि फ्रांस वैश्विक व्यापार सहयोग का विरोधी नहीं है, लेकिन वह चाहता है कि किसी भी समझौते में
- कृषि सुरक्षा,
- पर्यावरणीय जवाबदेही, और
- निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा
को प्राथमिकता दी जाए।
यह संतुलित दृष्टिकोण फ्रांस को न केवल यूरोपीय संघ के भीतर एक प्रभावशाली आवाज़ देता है, बल्कि लैटिन अमेरिकी देशों को यह संदेश भी देता है कि यूरोप केवल बाज़ार नहीं, बल्कि मूल्यों और स्थिरता का भी साझेदार है।
📌 निष्कर्ष
इमैनुएल मैक्रों का दृष्टिकोण इस बात का प्रमाण है कि फ्रांस आर्थिक प्रगति के साथ-साथ किसानों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय को भी समान महत्व देता है।
उनका स्पष्ट संदेश है —
“किसी भी व्यापार समझौते को तभी स्वीकार किया जाएगा, जब वह हमारे कृषि समुदाय, पर्यावरण और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप हो।”