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🇮🇳 वंदे मातरम् के 150 वर्ष : गीत से जन-जन की भावना तक


भारत के इतिहास में कुछ रचनाएँ ऐसी हैं जो केवल शब्दों का समूह नहीं रहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा बन गईं। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ ऐसी ही कालजयी रचना है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज तक भारतीयों के मन में मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम और गर्व का संचार किया है।
वर्ष 2025 में इस अमर गीत की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है — यह केवल एक गीत की स्मृति नहीं, बल्कि भारतीय एकता, संस्कृति और राष्ट्रभावना का महोत्सव है।


✍️ वंदे मातरम् की उत्पत्ति


🇮🇳 स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरणास्रोत


🌸 सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्त्व


🎉 150 वर्ष का उत्सव


निष्कर्ष

पिछले 150 वर्षों से ‘वंदे मातरम्’ भारतीयता की डोर को मजबूती से बाँधने वाला गीत रहा है। यह हमें सिखाता है कि मातृभूमि के प्रति सम्मान और समर्पण ही सच्चे राष्ट्रनिर्माण की नींव है।
जब भी यह गीत गूंजता है, हर भारतीय के हृदय में गर्व, कृतज्ञता और देशभक्ति की भावना नव ऊर्जा के साथ जाग उठती है।


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