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कौशांबी में मौसम का कहर: धान की फसल बर्बाद, किसानों पर टूटा संकट

अभय सिंह [ रिपोर्टर कौशांबी ]

कौशांबी। 17 सितंबर की सुबह कौशांबी जिले में अचानक मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों के लिए बड़ा संकट खड़ा कर दिया। तेज आंधी और बारिश ने पूरे इलाके में तबाही मचा दी, जिससे धान की फसलें खेतों में ही बिछ गईं। किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया, जिससे वे हताश और निराश हो गए हैं।

सदर तहसील के पश्चिम शरीरा क्षेत्र में इस प्राकृतिक आपदा का सबसे अधिक असर देखने को मिला है। यहां आधा दर्जन से अधिक गांवों में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। आंधी और बारिश के कारण कई पेड़ और बिजली के खंभे भी गिर गए, जिससे बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। महेवा मूरतगंज मार्ग पर पेड़ गिर जाने से यातायात भी अवरुद्ध हो गया, जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

क्षेत्र के डहरई, खरौना, धबाडा, सोनौली, बरौली, चांदेराई सहित कई गांवों में धान की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गईं। आंधी-तूफान ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डाला है। मौसम विभाग की ओर से इस तरह के अचानक मौसम परिवर्तन की चेतावनी  मिलने  के बावजूद किसान पहले से तैयार नहीं थे।

फसलों के नुकसान के साथ-साथ कई घरों और सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है। सरकारी तंत्र अभी नुकसान के आकलन में जुटा हुआ है, जबकि किसान मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति का जायजा लेने के लिए सर्वेक्षण शुरू कर दिया है, लेकिन प्रभावित किसानों का कहना है कि सिर्फ सर्वेक्षण से ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

इस अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा ने किसानों की उम्मीदों पर गहरा प्रहार किया है, जो पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस संकट की घड़ी में किसानों की कितनी मदद कर पाते हैं।

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