
उत्तराखंड राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देहरादून में आयोजित भव्य रजत जयंती समारोह ने पूरे प्रदेश को गर्व और भावनाओं से भर दिया। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यवासियों को संबोधित करते हुए उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत, प्राकृतिक संपदा और विकास की उपलब्धियों को केंद्र में रखा।
🏔️ उत्तराखंड: आस्था, सौंदर्य और संस्कृति की भूमि
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड केवल चार धाम यात्रा का प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य ने देश की पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता को संरक्षित रखने में अद्वितीय भूमिका निभाई है।
🚀 विकास के पथ पर अग्रसर देवभूमि
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते ढाई दशकों में उत्तराखंड ने विकास की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने राज्य की प्रमुख परियोजनाओं—जैसे चारधाम ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन, और डिजिटल कनेक्टिविटी मिशन—को नये युग की नींव बताया। इन योजनाओं के माध्यम से पर्यटन, व्यापार और रोज़गार के नए अवसर खुल रहे हैं।
🪖 वीरता और युवा शक्ति को सलाम
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड को “वीरों की धरती” बताते हुए सैनिकों और युवाओं की भूमिका को विशेष रूप से सराहा। उन्होंने कहा कि राज्य के युवा अनुशासन, परिश्रम और देशभक्ति के प्रतीक हैं। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने नए सैनिक स्कूलों और कौशल विकास केंद्रों की स्थापना की घोषणा की, ताकि युवा वर्ग आधुनिक शिक्षा और प्रशिक्षण से सशक्त हो सके।
🌿 हरित विकास की दिशा में कदम
पर्यावरण संरक्षण को संबोधन का अहम विषय बनाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। उन्होंने राज्यवासियों से “ग्रीन उत्तराखंड अभियान” को सामूहिक जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी स्वच्छ हवा, जल और हरियाली का आनंद उठा सकें।
🔮 ‘उत्तराखंड @2047’ का विजन
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि 2047 में जब भारत स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा, तब उत्तराखंड को एक आदर्श, आधुनिक और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में पहचाना जाना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार, युवाओं और समाज के सभी वर्गों से मिलकर “विकसित उत्तराखंड” के लक्ष्य को साकार करने का आग्रह किया।
✍️ निष्कर्ष
उत्तराखंड की रजत जयंती केवल अतीत की उपलब्धियों का जश्न नहीं, बल्कि भविष्य की नई उड़ान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन राज्य के लिए प्रेरणा और संकल्प का संदेश देता है—जहाँ परंपरा की जड़ें मजबूत हों, विकास की दिशा स्थिर हो, और प्रकृति का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता पर हो। यह विजन उत्तराखंड को न केवल भारत का गौरव बनाएगा, बल्कि उसे वैश्विक पहचान की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा।