
नियाग्रा, कनाडा — 12 नवंबर 2025 को नियाग्रा में आयोजित G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने भाग लिया। इस उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “शक्ति के माध्यम से शांति” की नीति को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। रुबियो की उपस्थिति ने अमेरिका की विदेश नीति में सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया।
🔹 बैठक का उद्देश्य और प्रमुख मुद्दे
G7 समूह — जिसमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं — की यह बैठक वैश्विक चुनौतियों पर समन्वित रणनीति विकसित करने के लिए आयोजित की गई थी। इस बार के एजेंडे में निम्नलिखित प्रमुख विषय शामिल थे:
- यूक्रेन संकट और रूस पर प्रतिबंधों की समीक्षा
- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और मानवीय सहायता
- वैश्विक आतंकवाद और साइबर सुरक्षा
- जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा
- चीन की बढ़ती रणनीतिक गतिविधियों पर चर्चा
रुबियो ने इन सभी मुद्दों पर अमेरिका की स्पष्ट और दृढ़ नीति प्रस्तुत की, जिसमें सहयोग के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही गई।
🔹 “अमेरिकियों की सुरक्षा पहले” — रुबियो का संदेश
रुबियो ने ट्विटर पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी भागीदारी की जानकारी दी, जिसमें उन्होंने लिखा:
“हम एक ही लक्ष्य पर केंद्रित हैं: अमेरिकियों की सुरक्षा और संरक्षा को पहले रखना।”
इस बयान ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका की विदेश नीति अब केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा को वैश्विक मंच पर प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
🔹 राजनयिक संवाद और व्यक्तिगत मुलाकातें
बैठक के दौरान रुबियो ने कई देशों के विदेश मंत्रियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। एक तस्वीर में उन्हें विमान से उतरते हुए देखा गया, जबकि दूसरी तस्वीर में वे एक कनाडाई अधिकारी से संवाद करते नजर आए। इन मुलाकातों ने अमेरिका-कनाडा संबंधों की मजबूती और सहयोग की भावना को दर्शाया।
🔹 ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति की झलक
रुबियो की भागीदारी ट्रंप प्रशासन की उस नीति का हिस्सा है जिसमें अमेरिका की वैश्विक भूमिका को पुनर्परिभाषित किया जा रहा है। “शक्ति के माध्यम से शांति” की अवधारणा के तहत अमेरिका अब अधिक सक्रिय, स्पष्ट और सुरक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण अपना रहा है।