
25 नवंबर को रोम में इतिहास रचते हुए इटली और अल्बानिया के बीच पहला अंतर-सरकारी शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और अल्बानिया के प्रधानमंत्री एदी रामा की मौजूदगी में आयोजित यह बैठक दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और यूरोपीय क्षेत्रीय साझेदारी की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हुई।
🔹 प्रमुख समझौते और चर्चाएँ
1. सुरक्षा और रक्षा सहयोग:
दोनों देशों ने सीमा सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियानों और संगठित अपराध से निपटने के लिए एक संयुक्त रणनीति अपनाने पर सहमति जताई। इसके तहत इटली और अल्बानिया के सुरक्षा बलों के बीच प्रशिक्षण, सूचना-साझाकरण और तकनीकी सहायता को और मज़बूत किया जाएगा।
2. ऊर्जा और बुनियादी ढांचा विकास:
ऊर्जा साझेदारी को नई दिशा देते हुए दोनों नेताओं ने जलविद्युत और सौर ऊर्जा परियोजनाओं में संयुक्त निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। साथ ही, दोनों देशों को जोड़ने वाले परिवहन गलियारों और डिजिटल नेटवर्क के विस्तार के लिए बहुपक्षीय सहयोग पर भी सहमति बनी।
3. प्रवासन नीति और मानवीय सहयोग:
यूरोप में जारी प्रवासन संकट को देखते हुए दोनों देशों ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस संदर्भ में शरणार्थियों की सुरक्षा, पुनर्वास और कानूनी प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया गया।
🔹 मेलोनी और रामा की साझा दृष्टि
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस सम्मेलन को “विश्वास, पारदर्शिता और साझे हितों पर आधारित नए युग की शुरुआत” बताया। उन्होंने कहा:
“रोम में मेरे मित्र एदी रामा के साथ इटली–अल्बानिया का पहला अंतर-सरकारी सम्मेलन हमारे आपसी भरोसे और मजबूत सहयोग का प्रमाण है — चाहे विषय सुरक्षा का हो, ऊर्जा का, या प्रवासन प्रबंधन का।”
वहीं, प्रधानमंत्री एदी रामा ने कहा कि यह साझेदारी “यूरोप के भविष्य की ओर एक निर्णायक कदम” है और उन्होंने इटली की यूरोपीय एकता में अग्रणी भूमिका की सराहना की।
🔹 रणनीतिक और क्षेत्रीय महत्व
यह सम्मेलन केवल द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं, बल्कि बाल्कन क्षेत्र में स्थिरता, आर्थिक विकास और यूरोपीय एकीकरण के प्रयासों को सशक्त बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इटली, यूरोपीय संघ के एक प्रभावशाली सदस्य के रूप में, अल्बानिया के लिए यूरोपीय मानकों और सुधारों की राह को आसान बना रहा है।
🔹 निष्कर्ष
इटली–अल्बानिया शिखर सम्मेलन ने यह साबित किया कि आधुनिक कूटनीति अब केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा लक्ष्यों, व्यावहारिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर आधारित है। यह पहल भविष्य में अन्य यूरोपीय देशों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बन सकती है — जहाँ सहयोग, विश्वास और विकास एक साथ आगे बढ़ें।