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निकोल पार्कर की किताब पर डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया: अमेरिकी न्याय व्यवस्था में राजनीति की नई बहस


पूर्व एफबीआई विशेष एजेंट निकोल पार्कर की नई पुस्तक “The Two FBIs: The Bravery and Betrayal I Saw in My Time at the Bureau” ने अमेरिका की न्याय व्यवस्था और उसके भीतर मौजूद राजनीतिक प्रभावों पर तीखी चर्चा छेड़ दी है। इस पुस्तक को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा खुला समर्थन मिलने के बाद यह बहस और भी जोर पकड़ चुकी है।


📘 किताब का सार: दो चेहरे, एक एफबीआई

निकोल पार्कर अपनी किताब में एफबीआई के भीतर देखे गए दो विरोधाभासी चेहरों का चित्रण करती हैं:

1️⃣ पहली एफबीआई—कर्तव्यनिष्ठ और देशभक्त

इस पक्ष में वे उन एजेंट्स का वर्णन करती हैं जो जोखिमों और चुनौतियों के बीच भी देश की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं और पूरी निष्ठा से अपने काम को अंजाम देते हैं।

2️⃣ दूसरी एफबीआई—राजनीतिक प्रभावों से संचालित

पार्कर के अनुसार, संस्थान का दूसरा पक्ष राजनीतिक दबाव, व्यक्तिगत एजेंडा और शक्ति के दुरुपयोग से प्रभावित है, जहाँ कुछ अधिकारी अपनी सीमाएँ पार करते हुए संस्थान की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाते हैं।

पुस्तक में उन्होंने एक बड़ा विरोधाभास भी बताया—

उनके अनुसार यह असमानता दर्शाती है कि एजेंसी में प्राथमिकताओं को तय करने का ढांचा अब पहले जैसा नहीं रहा।


🇺🇸 ट्रंप का समर्थन: राजनीतिक विमर्श को मिली नई दिशा

ट्रंप ने पुस्तक की तारीफ करते हुए निकोल पार्कर को “सच्चे अमेरिकी राष्ट्रभक्तों की आवाज़” कहा। उन्होंने दावा किया कि यह किताब अमेरिकी न्याय व्यवस्था की “राजनीतिक हथियारबंदी” को उजागर करती है।
ट्रंप के इस बयान ने पुस्तक को एक राजनीतिक मोड़ दे दिया है, खासकर ऐसे समय में जब एफबीआई की निष्पक्षता पहले ही सवालों के घेरे में है।


🎙️ मीडिया में बढ़ती चर्चा

निकोल पार्कर ने हाल ही में FOX News के एक पॉडकास्ट में हिस्सा लिया, जहाँ उन्होंने बताया कि वे हमेशा देश की सेवा की भावना से एफबीआई का हिस्सा बनीं। लेकिन समय के साथ उन्होंने महसूस किया कि संस्थान के अंदर राजनीतिक दबाव और आंतरिक खींचतान ने वास्तविक मिशन को प्रभावित किया है।

उनकी पुस्तक अब केवल एक व्यक्तिगत कहानी नहीं, बल्कि अमेरिकी न्याय प्रणाली की कार्यशैली और पारदर्शिता पर राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुकी है।


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