
एशेज़ सीरीज़ के करीब आते ही इंग्लैंड क्रिकेट टीम के भीतर एक खास रिश्ता एक बार फिर सुर्खियों में है—पूर्व कप्तान जो रूट और वर्तमान कप्तान बेन स्टोक्स का। रूट ने साफ शब्दों में कहा है कि आगामी ऑस्ट्रेलिया दौरे में वह स्टोक्स के “उपकार का बदला चुकाने” के इरादे से उतरेंगे।
स्टोक्स—जो सिर्फ कप्तान नहीं, संकटमोचक भी रहे
जो रूट का मानना है कि जिस दौर में वह इंग्लैंड टेस्ट टीम की कमान संभाल रहे थे, उस मुश्किल समय में बेन स्टोक्स ने अपने शरीर और मानसिक ताकत को दांव पर लगाकर टीम को संभाले रखा।
जब इंग्लैंड की सफेद गेंद वाली टीमें लगातार बड़े टूर्नामेंटों—2023 वनडे वर्ल्ड कप (भारत) और 2024 टी20 वर्ल्ड कप (अमेरिका–वेस्टइंडीज)—के दबाव में जूझ रही थीं, स्टोक्स ने टेस्ट टीम को टूटने नहीं दिया।
रूट के अनुसार, “स्टोक्स ने कप्तानी के दौर में मुझे जितना सहारा दिया, उतना शायद कोई और नहीं दे सकता था। उन्होंने दर्द, चोट, और थकान की परवाह किए बिना टीम की जिम्मेदारी उठाई। अब मेरी बारी है उन्हें वही ऊर्जा लौटाने की।”
‘बैज़बॉल’ की चुनौती और ऑस्ट्रेलियाई कसौटी
स्टोक्स और कोच ब्रेंडन मैकुलम की आक्रामक रणनीति—बैज़बॉल—ने इंग्लैंड टेस्ट टीम में नई जान फूंक दी।
लेकिन अब यही शैली ऑस्ट्रेलिया की चुनौतीपूर्ण पिचों पर और भी कड़ी परीक्षा से गुज़रेगी, जहां इंग्लैंड लगभग 15 साल से कोई टेस्ट सीरीज़ नहीं जीत पाया है।
रूट का कहना है कि टीम में उनका योगदान सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्रेसिंग रूम का माहौल, सकारात्मक संवाद और कठिन परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखना भी उनकी जिम्मेदारी है।
“वरिष्ठ खिलाड़ी होने का मतलब सिर्फ मैदान पर प्रदर्शन नहीं, बल्कि टीम संस्कृति को मजबूत रखना भी है,” उन्होंने कहा।
स्टोक्स के नेतृत्व में रूट का स्वर्णिम दौर
बेन स्टोक्स के कप्तान बनने के बाद रूट ने अपना खेल एक नए स्तर पर पहुँचाया है।
अब तक स्टोक्स की कप्तानी में रूट 52.41 की औसत से 2,883 रन बना चुके हैं—10 शतक और 12 अर्धशतकों के साथ।
यह आँकड़े बताते हैं कि दोनों के बीच सिर्फ पेशेवर रिश्ता नहीं, बल्कि गहरा भरोसा भी है।
स्टोक्स भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि यह ऑस्ट्रेलियाई दौरा रूट के लिए “विशेष” होने वाला है। दोनों खिलाड़ियों की पारस्परिक समझ टीम को इस बड़े मंच पर अलग मजबूती देती है।
एशेज़ में इंग्लैंड की उम्मीदों का नया आधार
ऑस्ट्रेलिया की धरती पर इंग्लैंड की जीत का इतिहास कमजोर रहा है, लेकिन इस बार टीम की उम्मीदें रूट और स्टोक्स की इस अनोखी साझेदारी पर टिकी हैं।
जहां स्टोक्स रणनीतिक कमान संभालेंगे, वहीं रूट रन मशीन की तरह अग्रिम पंक्ति में लड़ाई लड़ेंगे।
रूट के शब्दों में—
“जब मैं कप्तान था, स्टोक्स हमेशा मेरे साथ खड़े थे। अब वे कप्तान हैं, और मेरी बारी है उनके लिए सब कुछ झोंक देने की।”