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धरती आबा बिरसा मुंडा: जनजागरण, सम्मान और ‘जनजातीय गौरव दिवस’ का प्रेरक संदेश


भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में अनेक वीरों ने अपने साहस, त्याग और नेतृत्व से एक नया इतिहास रचा। इन्हीं अमर नायकों में से एक हैं धरती आबा बिरसा मुंडा, जिनका जीवन केवल संघर्ष की कथा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, सामाजिक जागरूकता और समानता का संदेश देने वाला एक उज्ज्वल प्रेरणास्रोत है। उनके 150वें जन्म जयंती वर्ष पर देशभर में श्रद्धांजलि और सम्मान की लहर दिखाई दे रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नागरिकों को संबोधित करते हुए ‘जनजातीय गौरव दिवस’ पर अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त कीं।

बिरसा मुंडा: एक प्रेरणादायी संघर्ष की गाथा

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलीहातू गांव में हुआ था। कम उम्र में ही उन्होंने समाज में व्याप्त अन्याय, शोषण और दमन को अनुभव किया। यही पीड़ा उनके भीतर विद्रोह की चिनगारी बनकर जागी, जिसने आगे चलकर “उलगुलान” यानी महान जनविद्रोह को जन्म दिया।

उनका संदेश था—
“अपना शासन, अपनी जमीन और अपनी पहचान को सुरक्षित रखना ही असली आज़ादी है।”

उनकी बताई राह ने केवल मुंडा समुदाय को नहीं, बल्कि पूरी भारतीय जनजातीय परंपरा को एक नई चेतना दी। यही कारण है कि उन्हें ‘धरती आबा’ यानी ‘धरती के पिता’ के रूप में सम्मानित किया जाता है।

जनजातीय गौरव दिवस का महत्व

भारत सरकार ने 2021 में 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित किया। इसका उद्देश्य है—

यह दिवस न केवल इतिहास को याद करने का अवसर है, बल्कि वर्तमान पीढ़ियों को प्रेरित करने का संकल्प भी है।

योगी आदित्यनाथ का संदेश: प्रेरणा और सद्भाव का आह्वान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन सम्मान, समानता और स्वाभिमान के लिए जनजागरण का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने अविभाज्य भारत के निर्माण में आदिवासी समाज के योगदान को याद किया और कहा कि
“बिरसा मुंडा जी की क्रांति, त्याग और संघर्ष आज भी हमें समाज के कमजोर वर्गों के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है।”

उन्होंने राज्यवासियों को जनजातीय गौरव दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में सामूहिक प्रयासों का संकल्प भी दोहराया।

आदिवासी समाज: संस्कृति, संघर्ष और समृद्ध विरासत

भारत का आदिवासी समाज अपनी संस्कृति, लोककलाओं, प्रकृति प्रेम और जीवन शैली के लिए विश्वभर में जाना जाता है।

बिरसा मुंडा ने इसी सांस्कृतिक शक्ति को एक आंदोलन में बदला और यह सिद्ध कर दिया कि संगठित समाज किसी भी दमनकारी व्यवस्था को चुनौती दे सकता है।

आज के परिप्रेक्ष्य में बिरसा मुंडा का संदेश

आज सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक पहचान और विकास की समावेशी अवधारणा पर जोर दिया जा रहा है।
ऐसे समय में बिरसा मुंडा का संदेश अत्यंत प्रासंगिक है—

निष्कर्ष

धरती आबा बिरसा मुंडा केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि आज भी जीवंत प्रेरणा हैं। उनका जीवन संघर्ष, साहस और जन-शक्ति की मिसाल है। ‘जनजातीय गौरव दिवस’ हमें याद दिलाता है कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर का हर हिस्सा महत्वपूर्ण है, और आदिवासी समाज इस धरोहर का एक मजबूत स्तंभ है।

उनकी 150वीं जयंती न केवल स्मरण का अवसर है, बल्कि एक संकल्प है—
सम्मान, समानता और एकता के साथ नए भारत के निर्माण का।


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