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डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और M23 के बीच दोहा में ऐतिहासिक समझौता: अफ्रीका में शांति का नया सवेरा


15 नवंबर 2025 को कतर की राजधानी दोहा में वह क्षण आया जिसका इंतज़ार पूर्वी अफ्रीका के लाखों लोगों को था। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और M23 विद्रोही संगठन ने एक व्यापक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो पिछले कई वर्षों से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


✍️ संघर्ष की पृष्ठभूमि

पूर्वी कांगो का इलाका बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों से भरा है, और इन्हीं पर नियंत्रण को लेकर DRC सरकार और M23 समूह के बीच लगातार हिंसा होती रही। रवांडा के समर्थन से मजबूत हुए M23 ने क्षेत्र में अस्थिरता और विस्थापन को और बढ़ाया। जुलाई 2025 में एक प्रारंभिक सहमति बनने के बावजूद ज़मीनी स्तर पर तनाव खत्म नहीं हुआ था। इसलिए दोहा में हुआ यह नया समझौता विशेष महत्त्व रखता है।


🤝 दोहा शांति ढाँचे की प्रमुख बातें


🌍 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वागत

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस समझौते को “स्थायी शांति की दिशा में वास्तविक शुरुआत” बताया। उन्होंने सभी पक्षों की सकारात्मक सोच की सराहना की और कतर की निर्णायक भागीदारी के लिए विशेष धन्यवाद दिया।
मैक्रों ने यह भी दोहराया कि फ्रांस क्षेत्र में स्थिरता और शांति प्रयासों का निरंतर समर्थन करता रहेगा—जैसा कि उसने अक्टूबर में पेरिस में आयोजित ग्रेट लेक्स सम्मेलन के दौरान भी प्रदर्शित किया था।


🔍 आगे का रास्ता

हालाँकि इस समझौते के बाद तुरंत परिवर्तन की उम्मीद करना जल्दबाज़ी होगी, लेकिन यह एक विस्तृत और स्थायी शांति प्रक्रिया की बुनियाद रखता है। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि दोनों पक्ष इस समझौते को कितनी गंभीरता से लागू करते हैं और क्या यह पूर्वी कांगो को लंबे समय से चली आ रही हिंसा से मुक्त करा पाएगा।


📌 समापन

दोहा में हुआ यह समझौता न केवल DRC के लिए बल्कि पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के लिए आशा की एक नई किरण है। यदि समझौते की शर्तों को पूरी निष्ठा से लागू किया गया, तो यह संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और विकास के नए द्वार खोल सकता है।


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