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डोनाल्ड ट्रंप और मोहम्मद बिन सलमान की ऐतिहासिक भेंट: अमेरिका–सऊदी साझेदारी में नए युग की शुरुआत


वाशिंगटन डी.सी. में 18–19 नवंबर 2025 के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के बीच हुई उच्च-स्तरीय बैठक ने वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों में नई हलचल पैदा कर दी। यह मुलाक़ात ऐसे समय हुई है जब मध्य पूर्व में अस्थिरता और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच अमेरिका और सऊदी अरब अपनी साझेदारी को नए सिरे से मजबूती दे रहे हैं।


🔹 रणनीतिक रिश्तों का व्यापक विस्तार

इस ऐतिहासिक मुलाकात के दौरान सऊदी अरब ने अमेरिका में 1 ट्रिलियन डॉलर के विशाल निवेश पैकेज की घोषणा की—जो अब तक का सबसे बड़ा सऊदी निवेश माना जा रहा है।
निवेश मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में किया जाएगा:

इसके अलावा, अमेरिका ने सऊदी अरब को F-35 लड़ाकू विमानों की बिक्री पर सहमति जताई, जिससे दोनों देशों के रक्षा संबंध अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गए हैं।


🔹 सूडान संकट में संयुक्त भूमिका

राष्ट्रपति ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट कर सूडान में जारी “निर्दयी हिंसा” को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका, सऊदी अरब सहित अन्य क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर वहां स्थिरता लाने के लिए व्यापक प्रयास करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल मध्य पूर्व और अफ्रीका में अमेरिकी सक्रियता की वापसी का संकेत देती है।


🔹 खशोगी मामले पर सौम्यता

बैठक के दौरान पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या का मुद्दा भी चर्चा में आया, लेकिन ट्रंप ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की सख्त रिपोर्टों को पीछे रखते हुए MBS के नेतृत्व और सऊदी सुधार प्रयासों की सराहना की।
मानवाधिकार संगठनों ने इस रुख की आलोचना की, लेकिन ट्रंप ने इसे “व्यावहारिक रणनीतिक संतुलन” बताते हुए उचित ठहराया।


🔹 अब्राहम समझौते में सऊदी भूमिका का संकेत

ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वे चाहते हैं कि सऊदी अरब अब्राहम समझौते में शामिल हो।
यदि यह कदम आगे बढ़ता है, तो:

यह कदम दशकों पुराने क्षेत्रीय गतिरोध को बदलने की क्षमता रखता है।


🔹 सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

ट्रंप–MBS मुलाक़ात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा में रहीं। एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी खूब वायरल हुई:

“अगर ओबामा ने बिन लादेन को खत्म न किया होता, तो ट्रंप उसे भी किसी होटल डील के लिए व्हाइट हाउस बुला लेते!”

यह टिप्पणी ट्रंप के व्यापार-प्रधान फैसलों और उनके विवादास्पद कूटनीतिक रवैये पर कटाक्ष करती है।


निष्कर्ष

अमेरिका और सऊदी अरब की यह ऐतिहासिक बैठक वैश्विक कूटनीति में एक नया मोड़ साबित हो सकती है।
जहाँ एक ओर यह मुलाक़ात आर्थिक एवं रक्षा सहयोग को एक नई दिशा देती है, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार और पारदर्शिता जैसे मुद्दे अभी भी गंभीर बहस का विषय बने हुए हैं।
फिर भी, इसमें कोई संदेह नहीं कि आने वाले वर्षों में इस बैठक के प्रभाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति, मध्य पूर्व की स्थिरता और वैश्विक व्यापार पर गहराई से महसूस किए जाएंगे।


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