
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 19 नवंबर 2025 को आरास शहर में आयोजित एक विशेष संवाद सत्र में क्षेत्रीय अख़बार La Voix du Nord के पाठकों से प्रत्यक्ष बातचीत की। आम नागरिकों के सवालों का सीधे सामना करते हुए उन्होंने लोकतंत्र, डिजिटल मीडिया और एल्गोरिदम जैसे आधुनिक मुद्दों पर खुलकर अपने विचार साझा किए।
🟦 कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य
इस संवाद का मकसद था—
“डिजिटल तकनीक की तेज़ी से बदलती दुनिया में लोकतांत्रिक मूल्यों का भविष्य समझना और नागरिकों की आवाज़ को प्राथमिकता देना।”
मैक्रों ने कार्यक्रम की तस्वीर को X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा:
“Facing the readers of La Voix du Nord”,
जो दर्शाता है कि वे प्रत्यक्ष जनसंपर्क और पारदर्शिता को कितना महत्व देते हैं।
🟩 चर्चा के प्रमुख बिंदु
1. लोकतंत्र और एल्गोरिदमिक प्रभाव
मैक्रों ने कहा कि सोशल मीडिया के एल्गोरिदम अक्सर ऐसी सामग्री को बढ़ावा देते हैं जो भावनाओं को उकसाए—इससे तथ्य और तर्क आधारित चर्चाएँ कमजोर होती हैं।
उनके अनुसार,
“डिजिटल दुनिया की तेज़ी कभी-कभी लोकतांत्रिक बहस को दिशा से भटका देती है।”
2. नागरिकों की भागीदारी
मंच पर मौजूद लोगों ने विभिन्न सामाजिक और आर्थिक विषयों पर सवाल किए, जिनमें शामिल थे—
- रोज़गार से जुड़े मुद्दे
- शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियाँ
- किसानों की चिंताएँ
- मीडिया की स्वतंत्रता जैसे संवेदनशील विषय
3. सोशल मीडिया की दोहरी भूमिका
राष्ट्रपति ने माना कि डिजिटल प्लेटफॉर्म लोकतंत्र को मजबूत भी करते हैं और कई बार उसके लिए बाधाएँ भी पैदा कर देते हैं।
उनका स्पष्ट मत था कि—
“तकनीक और लोकतंत्र के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार का दायित्व है।”
🟨 डिजिटल प्रसारण और जनता की प्रतिक्रिया
यह कार्यक्रम X.com पर लाइव प्रसारित किया गया, जिसे
86,800 से अधिक व्यूज,
220 रीपोस्ट,
770 लाइक्स,
और 36 बुकमार्क मिले।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि नागरिक इस संवाद को लेकर बेहद उत्साहित और जिज्ञासु थे।
🟥 विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
कार्यक्रम के दौरान शहर के कुछ हिस्सों में किसानों का विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला। इसके बावजूद, मैक्रों ने शांतिपूर्वक चर्चा जारी रखते हुए कहा कि असहमति और विरोध भी लोकतंत्र का ही हिस्सा हैं।
🔚 निष्कर्ष
राष्ट्रपति मैक्रों की यह पहल फ्रांस में लोकतांत्रिक परंपराओं को डिजिटल युग की चुनौतियों के बीच और भी मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। नागरिकों से सीधे संवाद करके उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि—
सरकारें केवल फैसलों से नहीं, बल्कि सहभागिता, पारदर्शिता और संवाद से आगे बढ़ती हैं।