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इटली–क्रोएशिया संबंधों में नई सक्रियता: जॉर्जिया मेलोनी और आंद्रेय प्लेंकोविच की उच्च स्तरीय बैठक


इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेय प्लेंकोविच ने 19 नवंबर 2025 को रोम के ऐतिहासिक पालाज़ो कीगी में एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह बैठक दोनों देशों के बीच विकसित हो रहे रणनीतिक संबंधों को और मजबूती देने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।


🔷 बैठक की प्रमुख उपलब्धियाँ

1. द्विपक्षीय सहयोग को नई रफ्तार

दोनों नेताओं ने इटली–क्रोएशिया संबंधों को “उत्कृष्ट और प्रगतिशील” बताया। उन्होंने रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, निवेश, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान–प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तृत करने की सहमति जताई।

2. 2026 में संयुक्त सरकारी सत्र का निर्णय

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा कि दोनों देशों ने वर्ष 2026 में एक जॉइंट गवर्नमेंट सेशन आयोजित करने की घोषणा की। इस सत्र में साझा प्राथमिकताओं की पहचान की जाएगी और दीर्घकालिक साझेदारी के लिए नई रणनीति तैयार की जाएगी।

3. व्यापार संबंधों पर सकारात्मक चर्चा

प्रधानमंत्री प्लेंकोविच ने बताया कि इटली लंबे समय से क्रोएशिया का शीर्ष व्यापारिक साझेदार रहा है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार का स्तर लगभग 9 अरब यूरो के करीब है, जिसे आने वाले समय में और बढ़ाने की योजना है।


🏛️ प्रेस वार्ता और सार्वजनिक संदेश

बैठक के बाद दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

मेलोनी ने अपने आधिकारिक संदेश में इस मुलाकात को “उपयोगी, सार्थक और रणनीतिक” बताया, जबकि प्लेंकोविच ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के लिए इटली की सक्रिय भूमिका की सराहना की।


🌍 रणनीतिक महत्व और भविष्य की दिशा

1. यूरोपीय संघ में बढ़ता समन्वय

दोनों देश EU के सक्रिय सदस्य हैं। बैठक ने संकेत दिया कि भविष्य में वे यूरोपीय नीतियों, सीमा सुरक्षा और आर्थिक सुधारों जैसे मुद्दों पर एकसाथ काम करेंगे।

2. क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग

बाल्कन क्षेत्र की स्थिरता तथा ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर भी दोनों नेताओं ने विशेष जोर दिया। नवीकरणीय ऊर्जा, गैस कनेक्टिविटी और समुद्री सुरक्षा जैसे विषय चर्चा का हिस्सा रहे।


📌 निष्कर्ष

इटली और क्रोएशिया की यह बैठक केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि दोनों देशों के बीच उभरती हुई रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली ठोस पहलों का प्रतीक थी। आने वाले वर्षों में व्यापार, सुरक्षा, ऊर्जा और कूटनीति के क्षेत्रों में इन दोनों यूरोपीय देशों के बीच सहयोग के और भी व्यापक स्वरूप देखने को मिलेंगे। यह न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देगा, बल्कि पूरे यूरोपीय क्षेत्र में स्थिरता और विकास को भी मजबूती प्रदान करेगा।


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