HIT AND HOT NEWS

इज़राइल द्वारा हिज़्बुल्लाह कमांडर अली तबातबाई की हत्या: पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और नई भू-राजनीतिक हलचल


23 नवंबर 2025 की रात मध्य पूर्व के लिए एक और अस्थिर करने वाली खबर लेकर आई। इज़राइली रक्षा बलों (IDF) ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहीयेह में एक हाई-प्रिसिजन हवाई हमले को अंजाम दिया, जिसमें हिज़्बुल्लाह के वरिष्ठ सैन्य नेता हायतम अली तबातबाई मारे गए। यह हमला न केवल लंबे समय से चले आ रहे इज़राइल–हिज़्बुल्लाह संघर्ष को नई दिशा देता है, बल्कि क्षेत्रीय भू-राजनीति को भी झकझोर देता है।


अली तबातबाई: हिज़्बुल्लाह की सैन्य संरचना का अहम स्तंभ

हायतम अली तबातबाई हिज़्बुल्लाह की सैन्य रणनीति के प्रमुख दिमागों में गिने जाते थे। संगठन में उन्हें “चीफ ऑफ स्टाफ” जैसी प्रभावी भूमिका प्राप्त थी।

उनकी मौत हिज़्बुल्लाह की सैन्य नेतृत्व संरचना में एक महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है।


इज़राइल की सैन्य कार्रवाई: संदेश स्पष्ट और कठोर

इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस ऑपरेशन को “सटीक और पूरी तरह सफल” बताते हुए कहा कि उनकी सरकार किसी भी खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका बयान बेहद तीखा था:

“मेरे नेतृत्व में कोई भी आतंकवादी सुरक्षित नहीं है। जो इज़राइल के खिलाफ हथियार उठाएगा, उसका अंत तय है।”

यह बयान दर्शाता है कि इज़राइल हिज़्बुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को खत्म करने और उसके नेतृत्व पर केंद्रित प्रहार करने की नीति को आगे बढ़ा रहा है। इस कार्रवाई का मकसद लेबनान की सरकार पर भी दबाव बढ़ाना है कि वह हिज़्बुल्लाह को नियंत्रण में लाए।


लेबनान की प्रतिक्रिया और मानवीय नुकसान

हवाई हमले में तबातबाई के साथ दो अन्य वरिष्ठ कमांडर भी मारे गए। इसके अलावा पांच नागरिकों की मौत और बीस से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है।

लेबनान सरकार ने इस हमले को “संप्रभुता का उल्लंघन” बताते हुए कड़ी निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब बेरूत पिछले पांच महीनों से अपेक्षाकृत शांत था। अब इस घटना ने फिर से तनाव की लपटों को हवा दे दी है।


क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर: नया अध्याय या पुराने संघर्षों की वापसी?

तबातबाई की हत्या को विशेषज्ञ इज़राइल के लिए एक बड़ी ऑपरेशनल सफलता मानते हैं, लेकिन इसके संभावित प्रभाव कहीं अधिक व्यापक हो सकते हैं।


निष्कर्ष

अली तबातबाई की मौत ने इज़राइल–हिज़्बुल्लाह संघर्ष में एक निर्णायक बदलाव ला दिया है। यह स्पष्ट संदेश है कि इज़राइल अब हिज़्बुल्लाह के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने की आक्रामक नीति पर चल पड़ा है।

मगर सवाल यह है कि क्या यह रणनीतिक सफलता क्षेत्र में स्थिरता लाएगी या फिर एक बड़े संघर्ष की भूमिका तैयार कर रही है। आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम पूरे मध्य पूर्व की दिशा तय कर सकता है।


Exit mobile version