
विश्वप्रसिद्ध वास्तुकार फ्रैंक गेहरी के निधन ने कला और डिज़ाइन की दुनिया में गहरा शोक पहुँचा दिया है। अमेरिका की पूर्व हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने उनके प्रति विशेष श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए उन्हें “वास्तुकला का विनम्र महागुरु” और “भविष्य के अनूठे दृष्टा” कहा। यह लेख गेहरी की अद्भुत रचनात्मकता, उनके वैश्विक प्रभाव और पेलोसी की मन से निकली भावनाओं को समर्पित है।
🏛️ फ्रैंक गेहरी: कल्पना को आकार देने वाला शिल्पकार
टोरंटो में जन्मे और सांता मोनिका को अपना घर बनाने वाले फ्रैंक गेहरी आधुनिक वास्तुकला के उन विरले नामों में से थे जिन्होंने डिज़ाइन को एक नई भाषा दी। उनकी मशहूर कृतियाँ—
• वॉल्ट डिज़्नी कॉन्सर्ट हॉल (लॉस एंजेलिस)
• गुगनहाइम म्यूज़ियम (बिलबाओ)
• फाउंडेशन लुई विटॉन (पेरिस)
दुनिया की उन इमारतों में गिनी जाती हैं जिन्हें देखकर केवल आश्चर्य नहीं होता, बल्कि कला का जीवंत अनुभव होता है।
गेहरी की इमारतें पारंपरिक ढाँचों से आगे बढ़कर भावनाओं, प्रवाह और साहसिक कल्पनाओं को मूर्त रूप देती थीं। वे मानते थे कि वास्तुकला केवल इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि एक ऐसा कैनवास है जिस पर समाज और संस्कृति अपनी कहानी लिखते हैं।
🗣️ नैन्सी पेलोसी की भावनाएँ: एक महान व्यक्तित्व को सलाम
पेलोसी ने अपने शोक संदेश में लिखा:
“फ्रैंक गेहरी ने दुनिया को यह सिखाया कि उद्देश्य को कला में बदला जा सकता है—और वही उनकी सबसे बड़ी देन है।”
उन्होंने गेहरी को ऐसा रचनाकार बताया जिसने न केवल अमेरिका पर, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक धरोहर पर भी स्थायी छाप छोड़ी। पेलोसी ने उनके सदैव विनम्र रहने वाले व्यक्तित्व, सामाजिक योगदान और मानवीय दृष्टिकोण की विशेष सराहना की।
उनके अनुसार,
“फ्रैंक ने लॉस एंजेलिस, कैलिफ़ोर्निया और पूरी दुनिया को अपनी कला से समृद्ध किया—और उनकी उदारता ने हर दिल को छुआ।”
🌍 दुनिया पर गेहरी का प्रभाव और विरासत
फ्रैंक गेहरी की सोच ने वास्तुकला की पारंपरिक सीमाओं को चुनौती दी।
- उन्होंने टाइटेनियम, स्टील और काँच जैसे आधुनिक सामग्रियों को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया।
- उनकी इमारतें स्थिर नहीं लगतीं—वे मानो गतिशील ऊर्जा का रूप होती हैं।
- दुनिया भर के युवा डिज़ाइनरों के लिए वे निर्भीक कल्पना और स्वतंत्र सोच का प्रतीक थे।
उनकी मृत्यु के बाद विश्वभर में श्रद्धांजलि संदेशों की झड़ी लग गई। लोगों ने उन्हें “रूपों के जादूगर” और “संरचनाओं का कवि” कहकर याद किया।
❤️ निजी जीवन और अंतिम अलविदा
96 वर्ष की उम्र में सांता मोनिका स्थित अपने आवास पर उन्होंने शांतिपूर्वक अंतिम साँस ली। पेलोसी दंपति ने गेहरी की पत्नी बर्टा और पूरे परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा—
“उनकी आत्मा को शांति मिले—May he rest in peace.”
🌟 निष्कर्ष: एक ऐसी विरासत जो आने वाली पीढ़ियों को दिशा देगी
फ्रैंक गेहरी की विरासत केवल उनकी प्रतिष्ठित इमारतों में नहीं, बल्कि उन विचारों में भी जीवित है जो उन्होंने दुनिया को दिए—
कि वास्तुकला केवल निर्माण नहीं, बल्कि संवाद है; एक ऐसी कला जो मन को छूती है और समाज को जोड़ती है।
वे चले गए, लेकिन उनका बनाया संसार आने वाले समय को मार्गदर्शन देता रहेगा।