
रुपये को समझने का सही तरीका—आर्थिक हकीकत, न कि राजनीतिक दृष्टि**
हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट 2025 के मंच पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय रुपये की गिरावट पर चल रही चर्चाओं को नई दिशा देते हुए एक स्पष्ट और संतुलित बयान रखा। उन्होंने कहा कि रुपये की विनिमय दर को परखने का सही तरीका केवल राजनीति नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक बुनियाद और वैश्विक परिस्थितियों के साथ उसका संबंध समझना है।
💬 रुपये पर राजनीति नहीं, तथ्य आधारित चर्चा आवश्यक
सीतारमण ने बताया कि रुपये की चाल को लेकर कभी-कभी राजनीति हावी हो जाती है, जबकि यह पूरी तरह बाजार की मांग–आपूर्ति और आर्थिक संकेतकों पर निर्भर प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि आज भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर खड़ी है, इसलिए विनिमय दर के उतार-चढ़ाव को अकेले “संकट” के रूप में देखना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी सरकार रुपये को कृत्रिम सहारे देने की नीति के खिलाफ है और बाजार की स्वाभाविक ताकतों को काम करने देना ही दीर्घकालिक स्थिरता का रास्ता है।
📉 रुपये की कमजोरी और वैश्विक दबाव का प्रभाव
हाल ही में रुपया डॉलर के मुकाबले 90.43 के स्तर तक गिरा, जिसने कई निवेशकों को चिंतित कर दिया। सीतारमण ने इस पर कहा कि पूरी दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितताओं से गुजर रही है, जिसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर दिखना स्वाभाविक है।
उनके अनुसार,
“अल्पकालिक उतार-चढ़ाव किसी देश की वास्तविक मजबूती का पैमाना नहीं होते।”
उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की विकास दर, बढ़ता निवेश और स्थिर नीति वातावरण आर्थिक संतुलन को बनाए रखेगा।
🛃 अगला बड़ा कदम: सीमा शुल्क सुधार और पारदर्शिता
वित्त मंत्री ने HTLS 2025 में यह भी घोषणा की कि जीएसटी और प्रत्यक्ष कर ढांचे में बड़े बदलावों के बाद अब उनका ध्यान सीमा शुल्क व्यवस्था को आधुनिक और सरल बनाने पर है।
उनके अनुसार:
- पुरानी नीतियों के कारण व्यापार में अनावश्यक बाधाएँ पैदा होती हैं।
- जटिल शुल्क संरचना से निर्यातकों पर बोझ बढ़ता है।
- निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नीति की स्पष्टता और सरलता ज़रूरी है।
उन्होंने कहा कि पुरानी “टैक्स टेररिज़्म” जैसी अवधारणाओं को खत्म करके व्यवसाय–अनुकूल वातावरण बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
📊 विनिमय दर को आर्थिक संकेतकों के संदर्भ में पढ़ें
सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि रुपये के व्यवहार को समझना है तो इन प्रमुख तत्वों पर नज़र डालनी होगी:
- मुद्रास्फीति
- विदेशी पूंजी का आवागमन
- चालू खाते का संतुलन
- वैश्विक आर्थिक माहौल
- अमेरिकी डॉलर की मजबूती
उन्होंने कहा कि विनिमय दर कोई एक दिन की कहानी नहीं होती, बल्कि यह कई आर्थिक प्रक्रियाओं का सम्मिलित परिणाम है।
निष्कर्ष
HTLS 2025 में निर्मला सीतारमण का बयान स्पष्ट करता है कि भारत आर्थिक निर्णयों को राजनीति से अलग रखते हुए दीर्घकालिक स्थिरता, सरल नीतियों और पारदर्शिता को प्राथमिकता दे रहा है। रुपया कैसे आगे बढ़ेगा—यह बाजार की ताकतें, वैश्विक परिस्थितियाँ और भारत की आर्थिक रणनीति तय करेगी, न कि केवल राजनीतिक टिप्पणियाँ।