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नेहा सिंह राठौर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज: सोशल मीडिया पोस्ट पर बढ़ा विवाद


प्रसिद्ध भोजपुरी लोकगायिका और कंटेंट क्रिएटर नेहा सिंह राठौर एक बार फिर कानूनी बहस के केंद्र में हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 5 दिसंबर 2025 को उनकी अग्रिम जमानत से जुड़ी याचिका को निरस्त कर दिया। यह याचिका उस एफआईआर से राहत पाने के लिए लगाई गई थी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई एक कथित टिप्पणी के कारण दर्ज की गई थी।


मामले की पृष्ठभूमि

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था। इस दुखद घटना के अगले दिन नेहा सिंह राठौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार पर जाति और धर्म आधारित राजनीति का आरोप लगाया।

उनकी इस टिप्पणी को लेकर 27 अप्रैल 2025 को लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नेहा का पोस्ट प्रधानमंत्री के प्रति निंदात्मक है और इससे समाज में जातीय तनाव व विवाद को बढ़ावा मिल सकता है।


कोर्ट का फैसला

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बृज राज सिंह की एकल पीठ ने साफ कहा कि नेहा ने जांच एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं किया है। न्यायालय ने यह भी जोड़ा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, इस स्तर पर एफआईआर की वैधता की जांच नहीं की जा सकती।

हालाँकि तकनीकी रूप से याचिका विचार योग्य मानी गई क्योंकि एफआईआर उस जिले में दर्ज हुई थी जहां नेहा की निवासस्थली नहीं है, लेकिन अदालत ने घटना की गंभीरता को देखते हुए उन्हें अग्रिम जमानत देने का आधार नहीं पाया।


नेहा सिंह राठौर का पक्ष

मीडिया से बातचीत में नेहा ने कहा कि उनकी पोस्ट किसी गीत का हिस्सा नहीं बल्कि एक सवाल था, जिसे उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री से पूछा था। उनका कहना था कि उनकी बातों को संदर्भ से हटकर प्रस्तुत किया गया और उनका उद्देश्य किसी का अनादर करना नहीं था।


निष्कर्ष

नेहा सिंह राठौर का मामला फिर एक बार यह बड़ा सवाल खड़ा करता है कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाएँ क्या होनी चाहिए। हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने से यह संकेत मिलता है कि अदालतें राष्ट्रीय सुरक्षा या संवेदनशील मुद्दों से जुड़े मामलों में विशेष सतर्कता बरतती हैं।


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