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एयरपोर्ट अव्यवस्था पर उठते सवाल: यात्रियों की पीड़ा और प्रशासनिक जवाबदेही


हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो ने देशभर में हवाई यात्रा की व्यवस्थाओं पर बहस छेड़ दी है। इस वीडियो में एक महिला यात्री अपने सामान के गायब होने से बेहद परेशान दिखाई देती है और भावुक होकर स्टाफ से बार-बार अपना लगेज वापस देने की विनती करती है। यह दृश्य ना सिर्फ व्यक्तिगत दुख को दर्शाता है बल्कि यात्रा प्रणाली में मौजूद कमियों को भी उजागर करता है।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस वीडियो को साझा करते हुए सरकार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी नीतियाँ जनता के लिए राहत देने के बजाय परेशानी का कारण बनें, तो उन नीतियों की समीक्षा आवश्यक हो जाती है। उनके अनुसार, अव्यवस्थित सिस्टम तब तक सुधरेगा नहीं, जब तक यात्रियों की वास्तविक समस्याओं को गंभीरता से न लिया जाए।

क्या एयरपोर्ट सुविधाएँ यात्रियों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त हैं?

पिछले कुछ वर्षों में भारत में हवाई यात्रा का दायरा तेजी से बढ़ा है। लेकिन इस वृद्धि के साथ ही कई प्रमुख एयरपोर्टों पर भीड़, लंबी कतारें, उड़ानों की अनियमितता और लगेज संभालने में लापरवाही जैसी शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। जिस घटना की चर्चा हो रही है, वह इन्हीं समस्याओं की ओर संकेत करती है — जहाँ एक यात्री को केवल अपना सामान वापस पाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

महिला बार-बार स्टाफ से कहती हैं,
“मुझे सिर्फ मेरा बैग चाहिए… और कुछ नहीं।”

यह वाक्य उस यात्री की असहाय स्थिति का प्रतीक बन गया है, जो अपनी यात्रा पूरी करने के बजाय बुनियादी सुविधा की उम्मीद में खड़ी रह जाती है।

व्यवस्था सुधार की जरूरत क्यों?

निष्कर्ष

यह वीडियो सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी नहीं दिखाता, बल्कि एक बड़े मुद्दे की ओर संकेत है—हवाई यात्रा से जुड़े ढांचे को आधुनिक, मानवीय और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता। जब तक एयरपोर्ट और एयरलाइन सेवाएँ यात्रियों के भरोसे पर खरी नहीं उतरेंगी, तब तक “उड़ान” का सपना अधूरा ही रहेगा।


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