
बच्चे परिवार की खुशी का केंद्र होते हैं, और उनकी सेहत को लेकर हर माता-पिता स्वाभाविक रूप से सजग रहते हैं। भारतीय घरों में वर्षों से ऐसे कई घरेलू नुस्खे अपनाए जाते रहे हैं जो बच्चों की हल्की अस्वस्थता या रोज़मर्रा की तकलीफों को कम करने में मदद करते हैं। ये नुस्खे प्राकृतिक, सरल और बिना किसी कठोर रसायन के होते हैं।
यह लेख बच्चों के लिए कुछ ऐसे ही सुरक्षित घरेलू उपायों पर आधारित है, जिन्हें सामान्य देखभाल के रूप में अपनाया जा सकता है।
1. हल्का गुनगुना पानी – पाचन और हाइड्रेशन के लिए लाभकारी
गुनगुना पानी बच्चों की पाचन शक्ति को हल्के रूप में सहारा देता है।
- सुबह हल्का गुनगुना पानी गैस और कब्ज जैसे हल्के लक्षणों में सुधार ला सकता है।
- ठंड के मौसम में यह शरीर को आराम देता है और गले को राहत पहुँचाता है।
सावधानी: पानी हमेशा साफ और उबाला हुआ हो।
2. अजवाइन का हल्का धुआँ – बंद नाक में आराम
अगर बच्चों को हल्की ठंड या बंद नाक की परेशानी हो:
- एक छोटी पोटली में सूखी अजवाइन हल्का गर्म करके सूँघने से आराम मिल सकता है।
- यह नुस्खा कई दादियों-नानियों द्वारा वर्षों से इस्तेमाल होता आ रहा है।
सावधानी: पोटली कभी भी बहुत गर्म न हो, ताकि बच्चे की त्वचा न जले।
3. शहद और गुनगुना पानी (एक साल से बड़े बच्चों के लिए)
एक साल से बड़े बच्चों में हल्की खराश या हल्के खांसी लक्षणों में:
- आधा चम्मच शहद गुनगुने पानी के साथ दिया जा सकता है।
- शहद गले को कोट करता है और आराम देता है।
सावधानी: एक साल से छोटे बच्चों को शहद कभी न दें।
4. हल्का तेल मसाज – शरीर को आराम और नींद में सुधार
सरसों, नारियल या बादाम के तेल की हल्की मालिश:
- शरीर में रक्त संचार को बेहतर करती है।
- बच्चों को बेहतर नींद और रिलैक्सेशन देती है।
- सर्दियों में गर्माहट और गर्मियों में शरीर को नरमी देती है।
5. तुलसी का हल्का काढ़ा (थोड़ी मात्रा में)
तुलसी प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट करती है।
- 1–2 पत्ते पानी में उबालकर उसका बहुत हल्का अर्क बच्चों को दिया जा सकता है।
- यह गले और हल्के जुकाम में सहायक माना जाता है।
सावधानी: मात्रा हमेशा कम रखें, काढ़ा कभी तेज़ ना हो।
6. सादा दही – पेट के लिए आरामदायक
दही बच्चों के पाचन और आंतों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
- गर्मियों में ठंडक देता है।
- पाचन को हल्के रूप में संतुलित करता है।
7. गर्म पानी की सिकाई (हल्के दर्द या खिंचाव में)
यदि बच्चे को हल्का मांसपेशियों का दर्द हो:
- एक तौलिया को गर्म पानी में भिगोकर हल्की सिकाई की जा सकती है।
सावधानी: पानी बहुत गर्म न हो।
महत्वपूर्ण सावधानियाँ
- किसी भी घरेलू उपाय को दवाई का विकल्प न समझें।
- यदि बच्चे को लगातार परेशानी हो, बुखार बढ़े, साँस लेने में दिक्कत हो या अन्य गंभीर लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
- छोटे बच्चों के लिए कोई भी नुस्खा हमेशा बड़ों की देखरेख में ही अपनाएँ।
- किसी भी खाद्य पदार्थ से एलर्जी का इतिहास हो तो नुस्खे को न अपनाएँ।
निष्कर्ष
बच्चों की सेहत के मामले में घरेलू नुस्खे हमेशा हल्के, प्राकृतिक और सरल होते हैं। ये नुस्खे रोज़मर्रा की छोटी-मोटी परेशानियों में सहज राहत देते हैं। हालांकि, हर बच्चा अलग होता है, इसलिए किसी भी उपाय को अपनाते समय सावधानी और समझदारी बेहद जरूरी है।