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भारत में यूनेस्को की 20वीं अंतर-सरकारी समिति की बैठक: अमूर्त सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की दिशा में नया अध्याय


भारत 8 से 13 दिसंबर 2025 के बीच नई दिल्ली स्थित विश्वप्रसिद्ध लाल किला परिसर में यूनेस्को की 20वीं अंतर-सरकारी समिति की ऐतिहासिक बैठक की मेज़बानी कर रहा है। यह आयोजन भारत के लिए सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी जीवंत विरासत और परंपराओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का स्वर्ण अवसर है।


🇮🇳 भारत की सांस्कृतिक पहचान का भव्य प्रदर्शन

भारत उन देशों में शामिल है जहाँ सदियों पुरानी लोक कलाएँ, त्योहार, ज्ञान परंपराएँ और जीवनशैली आज भी सक्रिय रूप से जीवित हैं। यूनेस्को की इस महत्त्वपूर्ण बैठक से भारत को अपनी सॉफ्ट पावर को मजबूत करने का अवसर मिलता है।

अब तक 15 भारतीय सांस्कृतिक तत्व यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में शामिल किए जा चुके हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रमाण है।
इस वर्ष भारत ने दीवाली को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में नामित किया है—एक ऐसा त्योहार जो प्रकाश, भाईचारे और मानवीय मूल्यों का संदेश देता है।


🏛️ लाल किला: इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम

इस अंतरराष्ट्रीय बैठक के लिए लाल किला का चयन विशेष रूप से प्रतीकात्मक है।

इस प्रकार लाल किला पिछले और वर्तमान, दोनों सांस्कृतिक आयामों को जोड़ने वाला केंद्र बनकर उभरा है।


🌍 वैश्विक सहयोग का मंच

छह दिनों तक चलने वाली इस बैठक में विश्वभर के संस्कृति विशेषज्ञ, नीति निर्माता, शोधकर्ता और कलाकार भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य है—

यह सम्मेलन सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


📜 यूनेस्को का 2003 कन्वेंशन: संरक्षण का मूल आधार

यह बैठक यूनेस्को के प्रसिद्ध 2003 कन्वेंशन के तहत आयोजित की जा रही है, जिसे पेरिस में 32वीं महासभा के दौरान अपनाया गया था। इस कन्वेंशन का उद्देश्य है—

भारत इस कन्वेंशन का सक्रिय सदस्य रहा है और लगातार अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए प्रभावी प्रयास करता आया है।


🔍 निष्कर्ष

भारत द्वारा यूनेस्को की 20वीं अंतर-सरकारी समिति की मेज़बानी करना न केवल उसकी सांस्कृतिक नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर भारतीय परंपराओं के महत्व को रेखांकित करने वाला कदम भी है।

यह आयोजन स्पष्ट करता है कि भारत अपनी ऐतिहासिक धरोहर और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं को दुनिया के सामने सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करने के साथ-साथ उनके संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध है।


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