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नेतन्याहू का ‘40 हस्ताक्षर बहस’ में संबोधन: अंतरराष्ट्रीय आलोचना पर सख़्त रुख और नीतिगत स्पष्टता


8 दिसंबर 2025 को इज़राइल की संसद कनेसट में आयोजित विशेष ‘40 हस्ताक्षर बहस’ में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विपक्ष के आरोपों का सीधे और तीखे शब्दों में जवाब दिया। यह बहस इज़राइल की बदलती अंतरराष्ट्रीय छवि और विदेश नीति को लेकर बढ़ती आलोचनाओं पर केंद्रित थी।


🔹 क्या है ‘40 हस्ताक्षर बहस’?

कनेसट की यह विशेष प्रक्रिया तब लागू होती है जब विपक्षी दल कम से कम 40 सांसदों के हस्ताक्षर जमा कर प्रधानमंत्री को संसद में उपस्थित होने और उनके सवालों का उत्तर देने के लिए बाध्य करते हैं।
इस बार विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि—


🔹 नेतन्याहू की प्रतिक्रिया: “इज़राइल अब भी क्षेत्रीय महाशक्ति”

अपने विस्तृत संबोधन में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने विपक्ष के दावों को “तथ्यों से परे” बताते हुए कहा कि—

उन्होंने यह भी बताया कि:


🔹 घरेलू नीतियों पर विपक्ष के सवालों का जवाब

प्रधानमंत्री ने घरेलू मुद्दों पर भी खुलकर अपनी स्थिति रखी—


🔹 अंतरराष्ट्रीय आलोचना पर कठोर टिप्पणी

नेतन्याहू ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि संसद में कही गई कुछ बातें बाहरी शक्तियों द्वारा तोड़ी-मरोड़ी जाती हैं, जिससे—

उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि राष्ट्रीय मुद्दों पर ऐसी भाषा न इस्तेमाल की जाए जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर इज़राइल के खिलाफ हथियार बन सके।


🔹 समापन: सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत

यह पूरा भाषण न सिर्फ विपक्ष के आरोपों का जवाब था, बल्कि—

को स्पष्ट करने वाला वक्तव्य भी था। नेतन्याहू ने संदेश दिया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सक्रिय, सतर्क और मज़बूत है, और इज़राइल की वैश्विक स्थिति पहले से कहीं अधिक स्थिर बनी हुई है।


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