
9 दिसंबर 2025 को रोम के ऐतिहासिक पालेज़ो कीगी में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुई अहम वार्ता ने यूरोप की कूटनीतिक दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया। यह बैठक केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि रूस–यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक नए भरोसे को जन्म देती है।
शांति प्रक्रिया पर गहराई से चर्चा
मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने मौजूदा शांति प्रयासों की प्रगति का आकलन किया और आगामी चरणों के लिए संयुक्त रणनीति बनाई।
ज़ेलेंस्की ने दोहराया कि यूक्रेन किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जो उसके अधिकृत क्षेत्रों की पूर्ण वापसी का सम्मान नहीं करता। उनके शब्दों में, “यूक्रेन की अखंडता पर बातचीत संभव नहीं है; हमारी संप्रभुता सर्वोच्च है।”
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मेलोनी ने कहा कि इटली संघर्ष के समय से लेकर पुनर्निर्माण तक हर मोर्चे पर यूक्रेन के साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में विशेष सहायता पैकेज की घोषणा करते हुए बिजली संबंधी अवसंरचना के लिए उपकरण भेजने का वादा किया।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और यूरोपीय एकजुटता
बैठक से पहले ज़ेलेंस्की की पोप लियो XIV तथा कई यूरोपीय नेताओं से मुलाकातें शांति प्रक्रिया के व्यापक समर्थन को दर्शाती हैं।
अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 28-बिंदुओं की शांति योजना को यूक्रेन ने संशोधित करते हुए 20 बिंदुओं तक सीमित कर दिया है, ताकि योजना जमीनी हकीकत के अधिक अनुरूप हो सके।
ज़ेलेंस्की ने यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन में चुनाव कराने का निर्णय केवल यूक्रेनी जनता का अधिकार है और बाहरी दबाव इस प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकते।
भारत के लिए सीख
भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए यह कूटनीतिक घटनाक्रम महत्वपूर्ण संदेश छोड़ता है—किसी भी शांति वार्ता की नींव जनता की इच्छा, संवैधानिक मूल्य और राष्ट्रीय संप्रभुता पर ही टिकी होनी चाहिए।
ज़ेलेंस्की का रुख यह बताता है कि कठिन परिस्थितियों में भी लोकतांत्रिक सिद्धांतों को सर्वोपरि रखा जा सकता है।
निष्कर्ष
ज़ेलेंस्की और मेलोनी की यह मुलाकात केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यूरोपीय एकता, यूक्रेन की दृढ़ इच्छा–शक्ति और इटली की सक्रिय भूमिका का मजबूत संकेत थी।
यह वार्ता आने वाले समय में रूस–यूक्रेन संघर्ष को शांतिपूर्ण दिशा देने में एक अहम कदम साबित हो सकती है।