
यूक्रेन इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। रूसी सेना द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों ने देश के ऊर्जा ढांचे को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है। राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने हालिया बयान में बताया कि केवल एक सप्ताह के भीतर रूस ने यूक्रेन पर भारी मात्रा में ड्रोन, मिसाइलें और निर्देशित बमों का प्रयोग किया, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
ऊर्जा व्यवस्था को पंगु बनाने की रणनीति
रूस की सैन्य कार्रवाई का मुख्य निशाना यूक्रेन की ऊर्जा आपूर्ति रही है। ओडेसा, मिकोलेव, खेरसॉन, सुमी, चेर्निहिव और डोनबास जैसे क्षेत्रों में बिजलीघर, ट्रांसमिशन लाइनें और हीटिंग सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गए हैं। दिसंबर के मध्य की एक ही रात में सैकड़ों ड्रोन और दर्जनों मिसाइलें दागी गईं, जिनका उद्देश्य सर्दियों के दौरान नागरिकों को अंधेरे और ठंड में धकेलना था।
आम नागरिकों की बढ़ती परेशानियाँ
इन हमलों का सबसे गहरा असर आम लोगों पर पड़ा है। कई शहरों में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो चुकी है, जबकि ठंड के मौसम में हीटिंग सेवाओं का ठप होना जीवन के लिए खतरा बन गया है। इसके बावजूद, राहत और मरम्मत दल लगातार काम कर रहे हैं। ज़ेलेंस्की ने इन कर्मियों के साहस और समर्पण की खुले दिल से सराहना की और कहा कि यूक्रेनी समाज किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
शांति के लिए संवाद, आत्मसम्मान के साथ
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया है कि यूक्रेन युद्ध नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण और सम्मानजनक शांति चाहता है। इसी दिशा में आने वाले समय में कूटनीतिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण पहल की जाएंगी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि शांति तभी सार्थक होगी, जब वह देश की संप्रभुता और गरिमा की रक्षा करे।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका
यूक्रेन की मौजूदा स्थिति अब केवल एक देश तक सीमित नहीं रह गई है। यह वैश्विक सुरक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। ज़ेलेंस्की ने चेतावनी दी कि यदि आक्रामकता को समय रहते नहीं रोका गया, तो इसका प्रभाव अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। उनके अनुसार, यूक्रेन की रक्षा करना स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करने जैसा है।
निष्कर्ष
रूस द्वारा ऊर्जा ढांचे पर किए जा रहे हमले यूक्रेन की भौतिक संरचना के साथ-साथ नागरिकों के दैनिक जीवन को भी प्रभावित कर रहे हैं। फिर भी, यूक्रेन ने अदम्य साहस, एकजुटता और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। आज आवश्यकता है कि वैश्विक समुदाय एक स्वर में खड़ा होकर शांति, स्थिरता और मानवता के पक्ष में निर्णायक कदम उठाए।