
अमेरिका और मेक्सिको के बीच 15 दिसंबर 2025 को हुआ ‘मिनट 333’ समझौता सीमा-पार पर्यावरणीय सहयोग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। यह समझौता वर्षों से जारी टिजुआना नदी के प्रदूषण संकट को जड़ से खत्म करने की दिशा में उठाया गया अब तक का सबसे ठोस कदम है। इस नदी के प्रदूषण ने कैलिफ़ोर्निया के सैन डिएगो क्षेत्र और मेक्सिको के टिजुआना शहर को लंबे समय तक स्वास्थ्य, पर्यावरण और समुद्री पारिस्थितिकी के गंभीर खतरे में डाले रखा।
समझौते की मुख्य विशेषताएँ
‘मिनट 333’ के अंतर्गत मेक्सिको पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की प्रमुख जिम्मेदारी तय की गई है। इसके तहत:
- टिजुआना के मौजूदा जल-मल शोधन संयंत्र को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा।
- नदी में बहकर आने वाली गाद और ठोस अपशिष्ट को रोकने के लिए एक नया सिडीमेंट बेसिन विकसित किया जाएगा।
- भविष्य की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक अपशिष्ट प्रबंधन योजना लागू की जाएगी, ताकि समस्या दोबारा न उभरे।
वहीं अमेरिका पर कोई नया वित्तीय या निर्माण संबंधी दायित्व नहीं डाला गया है, लेकिन वह पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) और अंतरराष्ट्रीय सीमा एवं जल आयोग (IBWC) के माध्यम से निगरानी, तकनीकी सहयोग और समन्वय की भूमिका निभाएगा।
टिजुआना नदी संकट: दशकों पुरानी समस्या
टिजुआना नदी लंबे समय से बिना उपचारित अपशिष्ट जल और ठोस कचरा अमेरिका की ओर ले जाती रही है। इसके कारण:
- इम्पीरियल बीच और कोरोनाडो जैसे लोकप्रिय समुद्र तटों को बार-बार बंद करना पड़ा।
- स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों और नौसेना कर्मियों को संक्रमण, त्वचा रोग और सांस से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
- समुद्री जीवन और तटीय पारिस्थितिकी को गंभीर नुकसान पहुँचा।
यह संकट केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा मुद्दा बन चुका था।
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण
अमेरिकी प्रशासन ने इस समझौते को जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला निर्णायक कदम बताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इसे सीमा-पार प्रदूषण पर ठोस कार्रवाई का उदाहरण माना जा रहा है।
EPA प्रशासक ली ज़ेल्डिन ने कहा कि यह पहल समाधान की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन दीर्घकालिक सफलता तभी संभव है जब टिजुआना की तेजी से बढ़ती आबादी को ध्यान में रखकर योजनाएँ बनाई जाएँ।
वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे मानव स्वास्थ्य संकट के स्थायी समाधान की ओर बढ़ता हुआ आवश्यक कदम बताया और दोनों देशों की एजेंसियों के सहयोग की सराहना की।
चुनौतियाँ और भविष्य की परीक्षा
हालाँकि समझौता ऐतिहासिक है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक सफलता इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। EPA के उप प्रशासक डेविड फोटौही ने स्पष्ट किया कि केवल हस्ताक्षर पर्याप्त नहीं हैं — परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए धन, तकनीकी क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति तीनों की निरंतर आवश्यकता होगी।
निष्कर्ष
‘मिनट 333’ केवल अमेरिका और मेक्सिको के बीच एक जल-प्रबंधन समझौता नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि सीमा पार पर्यावरणीय संकटों का समाधान सहयोग और साझा जिम्मेदारी से संभव है। यदि इसे पूरी निष्ठा से लागू किया गया, तो यह टिजुआना नदी को फिर से जीवन दे सकता है और दोनों देशों के संबंधों में पर्यावरणीय विश्वास की नई नींव रख सकता है।