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व्हाइट हाउस की कड़ी आपत्ति: ग़ज़ा संघर्षविराम तोड़ने पर इज़राइल को सख्त संदेश, ट्रंप की साख पर समझौता नहीं


ग़ज़ा पट्टी में इज़राइल की हालिया सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक कूटनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस हमले के बाद अमेरिका ने इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को निजी तौर पर तीखी चेतावनी दी है। व्हाइट हाउस का साफ कहना है कि यह कार्रवाई उस संघर्षविराम समझौते के खिलाफ है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से अमल में लाया गया था।

संघर्षविराम की अवहेलना और वॉशिंगटन की नाराज़गी

ग़ज़ा सिटी में हुए इस हमले में हामास के सैन्य ढांचे से जुड़े वरिष्ठ कमांडर राएद साद समेत चार लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इस ऑपरेशन से पहले इज़राइल ने अमेरिका को न तो सूचित किया और न ही कोई परामर्श किया।

व्हाइट हाउस की ओर से नेतन्याहू को भेजे गए संदेश में बेहद सख्त लहजा अपनाया गया। संदेश का आशय स्पष्ट था—यदि इज़राइल अपने भरोसे और छवि को नुकसान पहुँचाना चाहता है, तो यह उसका निर्णय है, लेकिन अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दांव पर नहीं लगने देगा, जिन्होंने इस संघर्षविराम को संभव बनाया।

ट्रंप प्रशासन के भीतर असहमति

इस घटनाक्रम के बाद अमेरिकी सत्ता के गलियारों में बेचैनी साफ दिखी। विदेश मंत्री मार्को रूबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और वरिष्ठ सलाहकार जारेड कुशनर ने इज़राइल की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब ग़ज़ा संघर्षविराम के अगले चरण को लेकर बातचीत जारी थी, जिसे क्षेत्र में स्थिरता के लिए निर्णायक माना जा रहा था।

हामास की प्रतिक्रिया और आरोप

हामास के ग़ज़ा प्रमुख खलील अल-हय्या ने एक टीवी संबोधन में पुष्टि की कि राएद साद की मौत इज़राइली हवाई हमले में हुई। हामास का दावा है कि साद पहले हुए हमलों की रणनीति में शामिल था। संगठन ने इस सैन्य कार्रवाई को संघर्षविराम समझौते की खुली अवहेलना करार दिया है।

क्षेत्रीय राजनीति पर असर

यह घटना सिर्फ अमेरिका और इज़राइल के रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की शांति प्रक्रिया पर असर डाल सकती है। राष्ट्रपति ट्रंप की प्रस्तावित 20-सूत्रीय योजना, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिल चुकी है, अब गंभीर दबाव में नजर आ रही है। इस योजना का लक्ष्य ग़ज़ा में हामास के प्रभाव को खत्म कर दीर्घकालिक राजनीतिक समाधान की नींव रखना है।

निष्कर्ष

इज़राइल की हालिया सैन्य कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग़ज़ा में लागू संघर्षविराम कितना नाजुक है। व्हाइट हाउस की तीखी प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि अमेरिका इस समझौते को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और राष्ट्रपति ट्रंप की मध्यस्थ भूमिका को कमजोर होते नहीं देखना चाहता। आने वाले समय में यह तय होगा कि इज़राइल इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या इससे ग़ज़ा में शांति की संभावनाओं को नई दिशा मिलती है।


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