
यूक्रेन और रूस के बीच जारी लंबे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयास 14 दिसंबर 2025 को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में देखने को मिला। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ़ और पूर्व व्हाइट हाउस सलाहकार जैरेड कुश्नर के साथ उच्चस्तरीय चर्चा की। यह बैठक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही शांति कोशिशों की एक अहम कड़ी मानी जा रही है।
बातचीत का मकसद: सुरक्षा के साथ सम्मानजनक समाधान
इस बैठक का केंद्रीय उद्देश्य ऐसा शांति ढांचा तैयार करना था जो यूक्रेन की संप्रभुता, सुरक्षा और आत्मसम्मान को सुनिश्चित कर सके। चर्चा के दौरान ज़ेलेंस्की ने संकेत दिया कि यदि अमेरिका और यूरोपीय देश ठोस सुरक्षा गारंटी देने को तैयार हों, तो यूक्रेन नाटो की सदस्यता के मुद्दे पर अपने रुख में लचीलापन दिखा सकता है। विशेषज्ञ इसे यूक्रेन की रणनीति में एक बड़ा और व्यावहारिक बदलाव मान रहे हैं।
ज़ेलेंस्की का संदेश: समझौते में गरिमा सर्वोपरि
बैठक के बाद राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यदि इस तरह की चर्चाएँ पहले शुरू होतीं, तो समाधान की दिशा में और तेज़ी से आगे बढ़ा जा सकता था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित दस्तावेज़ों से कुछ ऐसे बिंदु हटाए गए हैं जो यूक्रेन के हितों के अनुकूल नहीं थे। ज़ेलेंस्की के अनुसार, किसी भी शांति समझौते में देश की “गरिमा” को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।
अमेरिका की सक्रिय भूमिका और ट्रंप प्रशासन का संकेत
इस बैठक में स्टीव विटकॉफ़ और जैरेड कुश्नर की मौजूदगी यह दर्शाती है कि अमेरिका, विशेष रूप से ट्रंप प्रशासन, अब युद्धविराम और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में अधिक सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। विटकॉफ़ पहले भी रूस-यूक्रेन विवाद से जुड़े विभिन्न शांति प्रस्तावों पर संवाद का हिस्सा रह चुके हैं, जिससे उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
यूरोप की एकजुटता: बहुपक्षीय समर्थन का संदेश
बर्लिन में हुई इस अहम बैठक में कई प्रमुख यूरोपीय नेता भी शामिल हुए। जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमायर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि यूरोप इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सामूहिक रूप से प्रतिबद्ध है।
निष्कर्ष: युद्ध से संवाद की ओर बढ़ता कदम
बर्लिन की यह बैठक यूक्रेन-रूस युद्ध के भविष्य को नई दिशा दे सकती है। नाटो सदस्यता पर पुनर्विचार, अमेरिका और यूरोप की संभावित सुरक्षा गारंटी और बहुपक्षीय सहयोग यह संकेत देते हैं कि अब टकराव की बजाय कूटनीति को आगे बढ़ाया जा रहा है। आने वाले समय में इन चर्चाओं से निकले समझौते इस युद्ध के अंत की नींव रख सकते हैं।