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चेक गणराज्य की राजनीति में आंद्रेज बाबिस की वापसी: यूरोप और विश्व के लिए नए संकेत

चेक गणराज्य की राजनीति में एक बार फिर आंद्रेज बाबिस का उदय हुआ है। 9 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति पेत्र पावेल द्वारा उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाए जाने के साथ ही बाबिस ने तीसरी बार देश की सत्ता संभाल ली। यह घटनाक्रम केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव यूरोपीय संघ और वैश्विक कूटनीति तक महसूस किए जा रहे हैं।


चुनावी जीत और राष्ट्रवादी गठबंधन की मजबूती

अक्टूबर 2025 में हुए संसदीय चुनावों में ANO पार्टी के नेता और उद्योगपति आंद्रेज बाबिस ने निर्णायक सफलता हासिल की। इसके बाद उन्होंने यूरोसेप्टिक रुख रखने वाली SPD और Motorists जैसी पार्टियों के साथ मिलकर गठबंधन सरकार का गठन किया। शपथ ग्रहण के बाद अपने पहले संबोधन में बाबिस ने यह स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता चेक नागरिकों के हितों की रक्षा करना और देश को आर्थिक व राजनीतिक रूप से अधिक सशक्त बनाना है।


अमेरिका के साथ नज़दीकी: ट्रंप से वैचारिक सामंजस्य

आंद्रेज बाबिस को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी राजनीतिक समर्थकों में गिना जाता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच Truth Social पर बाबिस को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देते हुए रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और अवैध आव्रजन जैसे मुद्दों पर सहयोग की इच्छा जताई। F-35 लड़ाकू विमानों से जुड़े रक्षा समझौतों पर भी दोनों देशों के बीच तालमेल बढ़ने के संकेत मिले हैं।


यूरोपीय संघ और यूक्रेन पर बदला हुआ दृष्टिकोण

नई सरकार के नीति वक्तव्य में यूरोपीय संघ को लेकर स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सदस्य देशों की संप्रभुता सर्वोपरि है और ब्रसेल्स को आंतरिक निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही, बाबिस ने चुनाव अभियान के दौरान यूक्रेन को दी जा रही सैन्य और आर्थिक सहायता पर पुनर्विचार की बात कही थी, जिससे रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर चेक गणराज्य की नीति में संभावित बदलाव के संकेत मिलते हैं।


अंतरराष्ट्रीय राजनीति में संभावित प्रभाव

बाबिस की वापसी से चेक गणराज्य की विदेश नीति में व्यावहारिकता और राष्ट्रहित पर केंद्रित दृष्टिकोण मजबूत होने की संभावना है। यूरोपीय संघ से संतुलित दूरी, अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग और घरेलू आर्थिक हितों को प्राथमिकता देना उनकी नीति का मुख्य आधार प्रतीत होता है।


निष्कर्ष

आंद्रेज बाबिस का तीसरा कार्यकाल चेक गणराज्य के लिए एक नए राजनीतिक चरण की शुरुआत हो सकता है। उनकी राष्ट्रवादी सोच, व्यापारिक अनुभव और अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ आने वाले वर्षों में न केवल देश की दिशा तय करेंगे, बल्कि यूरोपीय राजनीति के संतुलन को भी प्रभावित कर सकते हैं।

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